प्रश्नोत्तरी और एकल अभिनय प्रतियोगिता में छात्रों ने किया उत्कृष्ट प्रदर्शन, डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय और एम.के. सिंहा ने विजेताओं को किया सम्मानित
रांची, 14 अक्टूबर। डीएवी पब्लिक स्कूल, गांधीनगर, सीसीएल, रांची में राजभाषा विभाग, सीसीएल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरविद्यालयी हिंदी प्रतियोगिता-2026 का बुधवार को समापन हो गया। प्रतियोगिता के दूसरे दिन प्रश्नोत्तरी और एकल अभिनय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लेते हुए हिंदी भाषा, साहित्य और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना, उनकी सृजनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित करना और भाषायी कौशल को बेहतर मंच प्रदान करना था।
प्रश्नोत्तरी में साहित्य और व्याकरण से जुड़े सवालों के दिए जवाब
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों से हिंदी साहित्य, भाषा, व्याकरण, प्रमुख साहित्यकारों और उनकी रचनाओं से संबंधित प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने अपनी जानकारी और बौद्धिक क्षमता का परिचय देते हुए सवालों के जवाब दिए।
वहीं, एकल अभिनय प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने प्रभावशाली अभिनय, संवाद अदायगी, भावाभिव्यक्ति और मंचीय कौशल से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। प्रस्तुतियों में सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक भी देखने को मिली।
डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ने विजेताओं को किया सम्मानित
प्रतियोगिताओं के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय मुख्य अतिथि और एम.के. सिंहा, एआरओ, झारखंड जोन ‘बी’, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया।
मुख्य अतिथि डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और भावनात्मक एकता की सशक्त संवाहिका है। विद्यार्थियों को हिंदी का अध्ययन करने के साथ-साथ भाषा के शुद्ध, प्रभावशाली और रचनात्मक प्रयोग पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से हिंदी साहित्य पढ़ने और भाषा को ज्ञान, चिंतन तथा अभिव्यक्ति का प्रभावी माध्यम बनाने का आह्वान किया।
हिंदी के प्रचार-प्रसार में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अहम : एम.के. सिंहा
विशिष्ट अतिथि एम.के. सिंहा ने कहा कि राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और उसके व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ती है और उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, रचनात्मकता तथा सहयोग की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने के साथ उनकी प्रतिभा को उचित मंच उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, आयोजकों और प्रतिभागियों की सराहना की।
प्राचार्य प्रदीप कुमार झा ने जताया आभार
विद्यालय के प्राचार्य प्रदीप कुमार झा ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। विद्यार्थियों में भाषा के प्रति प्रेम, साहित्यिक अभिरुचि और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना विद्यालय की शैक्षणिक प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से आगे सीखने, अपनी प्रतिभा पहचानने और आत्मविश्वास के साथ विचार व्यक्त करने का अवसर देती हैं।
प्राचार्य ने मुख्य अतिथि डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि एम.के. सिंहा, राजभाषा विभाग सीसीएल, निर्णायक मंडल, विभिन्न विद्यालयों से आए प्राचार्यों, शिक्षकों, प्रतिभागियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों और सहयोग से यह आयोजन ज्ञान, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना का यादगार उत्सव बना।



