Navratri 2026 Day 5: मां स्कंदमाता की आराधना से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है। जानिए पूजा विधि, शुभ समय, भोग और आरती से जुड़ी खास बातें।
धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष 14 अक्टूबर को पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की आराधना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद देती हैं। मां की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की परेशानियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है। उनकी माता होने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता का स्वरूप, पूजा का शुभ समय, पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और व्रत कथा।
मां स्कंदमाता का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय बाल रूप में विराजमान रहते हैं। मां का वाहन सिंह है और उनका स्वरूप तेजस्वी माना जाता है। उन्हें कमल पर विराजमान होने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। संतान की कामना करने वाले श्रद्धालु भी मां की विशेष आराधना करते हैं।
मां स्कंदमाता पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि 14 अक्टूबर की रात 1 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 15 अक्टूबर की रात 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। ज्येष्ठा नक्षत्र और सौभाग्य योग का भी इस दिन विशेष उल्लेख है।
- सुबह 7:32 बजे से 7:47 बजे तक
- सुबह 10:15 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
दिए गए समय के अनुसार, इन अवधियों में पूजा की जा सकती है। दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक राहुकाल बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद मां स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
- लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां की तस्वीर स्थापित करें।
- मां को पीले फूल, वस्त्र और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
- इलायची, लौंग और पान का पत्ता चढ़ाएं।
- मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक 108 बार जाप करें।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और व्रत कथा सुनें।
- अंत में मां की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मां स्कंदमाता का प्रिय भोग
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को पीले रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त मां को केसर की खीर, पीले रंग की मिठाइयां और मौसमी फल अर्पित कर सकते हैं। पूजा में भोग लगाते समय श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
मां स्कंदमाता का मंत्र
मां स्कंदमाता की आराधना के समय इस मंत्र का जाप किया जाता है:
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
मां दुर्गा के मातृस्वरूप का स्मरण करते हुए इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
मां स्कंदमाता की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नामक असुर ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकता है। उस समय भगवान शिव तपस्या में लीन थे। इस वरदान के कारण तारकासुर का अत्याचार बढ़ने लगा और देवता परेशान हो गए।
देवताओं की प्रार्थना के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ। उनके पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ, जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है। माता पार्वती ने कार्तिकेय को युद्ध कौशल और अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान दिया। बड़े होकर भगवान कार्तिकेय देवताओं की सेना के सेनापति बने और तारकासुर का वध किया।
भगवान स्कंद को गोद में धारण करने वाली माता पार्वती के इसी स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के पांचवें दिन मां की पूजा करने से भक्तों को साहस, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
मां स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंदमाता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं।
हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं॥
कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥
कहीं पहाड़ों पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाएं तेरे भक्त प्यारे॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥
इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करें पुकार तुम्हारे द्वारे॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तुम ही खंडा हाथ उठाए॥
दासों को सदा बचाने आई।
भक्तों को दर्शन दिखलाई॥
जय मां स्कंदमाता। जय मां दुर्गा।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना कर भक्त परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।



