19 October 2026 Panchang: 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को शारदीय नवरात्रि की महानवमी तिथि रहेगी। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार, सोमवार सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। ऐसे में 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का संयोग रहेगा। कई श्रद्धालु इसी दिन अष्टमी पूजन करेंगे, जबकि नवमी तिथि का व्रत रखने वाले लोग सुबह 10:52 बजे के बाद नवमी पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं।
इस दिन धृति योग भी बन रहा है। वहीं चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में संचार करेंगे। आइए जानते हैं 19 अक्टूबर 2026 का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त और नवमी पूजा का महत्व।
19 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- वार: सोमवार
- तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी सुबह 10:52 बजे तक, इसके बाद नवमी
- धृति योग: रात 12:35 बजे तक
- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: दोपहर 3:39 बजे तक
- विशेष: महानवमी, माता सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन
- नवमी पूजा: सुबह 10:52 बजे के बाद
19 अक्टूबर 2026 के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:45 बजे से 5:35 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:10 बजे से 6:25 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:53 बजे से 6:18 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:53 बजे से 7:09 बजे तक
19 अक्टूबर को इन शहरों में रहेगा राहुकाल
| शहर | राहुकाल |
|---|---|
| दिल्ली | सुबह 7:50 से 9:15 बजे तक |
| मुंबई | सुबह 8:02 से 9:29 बजे तक |
| चंडीगढ़ | सुबह 7:53 से 9:18 बजे तक |
| लखनऊ | सुबह 7:34 से 9:00 बजे तक |
| भोपाल | सुबह 7:46 से 9:12 बजे तक |
| कोलकाता | सुबह 7:02 से 8:28 बजे तक |
| अहमदाबाद | सुबह 8:05 से 9:31 बजे तक |
| चेन्नई | सुबह 7:28 से 8:57 बजे तक |
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
19 अक्टूबर 2026 को दिए गए पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 6:24 बजे और सूर्यास्त शाम 5:48 बजे होगा।
महानवमी पर होती है माता सिद्धिदात्री की पूजा
शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सिद्धिदात्री भक्तों को सिद्धियां प्रदान करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
महानवमी के दिन माता की पूजा के साथ कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। नवमी पूजा और कन्या पूजन के साथ कई श्रद्धालुओं के नौ दिनों के नवरात्रि व्रत का समापन भी होता है।
डिस्क्लेमर: पंचांग, शुभ मुहूर्त और धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग पंचांगों तथा स्थान के अनुसार कुछ मिनटों तक भिन्न हो सकती हैं। पूजा या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग का मिलान करना उचित है।



