पटना: बिहार में विधान परिषद की सीटों के लिए हो रहे चुनाव के बीच पटना स्नातक और पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सबसे ज्यादा चर्चा में है। इस चुनाव का असर केवल उम्मीदवारों की जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि कई बड़े राजनीतिक चेहरों की साख भी इससे जुड़ गई है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेताओं ने इस चुनाव को गंभीरता से लिया है।
पटना की इन दोनों सीटों पर मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि यहां अलग-अलग राजनीतिक खेमों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर की भूमिका ने चुनाव को और हाई-प्रोफाइल बना दिया है।
सम्राट चौधरी की सक्रियता से बढ़ी चुनाव की अहमियत
पटना स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सक्रियता ने चुनाव की राजनीतिक अहमियत बढ़ा दी है। जदयू एमएलसी और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को लेकर मुख्यमंत्री पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी राय जाहिर कर चुके हैं।
नीरज कुमार की राजनीतिक भूमिका की तारीफ करते हुए सम्राट चौधरी ने उन्हें राजनीतिक मामलों का माहिर बताया था। हाल में नीरज कुमार की तबीयत खराब होने के बाद मुख्यमंत्री उनके स्वास्थ्य का हाल जानने अस्पताल भी पहुंचे। इसे राजनीतिक तौर पर नीरज कुमार के प्रति मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार नवल किशोर यादव के साथ भी सम्राट चौधरी के पुराने राजनीतिक संबंध रहे हैं। शिक्षकों से जुड़े कार्यक्रमों में सरकार की ओर से आर्थिक घोषणाओं को भी चुनावी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
लालू यादव ने भी संभाला मोर्चा
पटना स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की सक्रियता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक लालू यादव पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क कर अपने समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पटना, नालंदा और नवादा के नेताओं से संपर्क कर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में दिलीप पटेल और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में डॉ. संजीव कुमार के पक्ष में मतदान की अपील की जा रही है।
इससे साफ है कि राजद नेतृत्व इन दोनों सीटों को महज विधान परिषद का चुनाव नहीं, बल्कि संगठन और राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा के तौर पर देख रहा है।
निशांत कुमार की सक्रियता ने बढ़ाया सियासी पारा
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की सक्रियता भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर निशांत कुमार लगातार मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं।
नालंदा और नवादा जैसे इलाकों में उनके प्रचार और जनसंपर्क को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा है। उनकी सक्रियता से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस सीट के परिणाम को काफी अहम मान रहा है।
ऐसे में चुनावी नतीजा निशांत कुमार की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ और संगठन में उनकी भूमिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल
जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर के लिए भी पटना स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव महत्वपूर्ण है। वे चुनावी राजनीति को स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं से जुड़े सवालों के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हालिया बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी राजनीतिक रणनीति और मुद्दा आधारित अभियान की चर्चा हुई थी।
अगर पटना स्नातक या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज को मजबूत प्रदर्शन मिलता है, तो इससे प्रशांत किशोर के उस राजनीतिक मॉडल को बल मिल सकता है जिसमें स्थानीय मुद्दों और नए राजनीतिक समीकरणों पर जोर दिया जा रहा है।
पटना की दोनों सीटों पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
पटना स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव बिहार की मौजूदा राजनीति में कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ सत्ता पक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष और नए राजनीतिक विकल्प भी मतदाताओं के बीच अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं।
यही वजह है कि इन सीटों पर होने वाला मुकाबला केवल उम्मीदवारों की व्यक्तिगत जीत-हार नहीं माना जा रहा। इसके परिणाम से आने वाले समय में बिहार की राजनीति में अलग-अलग दलों और नेताओं की रणनीतिक स्थिति का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।



