Ranchi News: 30 अगस्त की आदिवासी एकता महारैली का विरोध, संगठनों ने लगाए चर्च की रणनीति के आरोप

Ranchi News: 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महारैली का विभिन्न संगठनों ने विरोध किया। परिसीमन, FCRA और डीलिस्टिंग मुद्दे पर जताई आपत्ति… Ranchi News: आदिवासी एकता महारैली का विरोध, 30 अगस्त की रैली पर संगठनों ने जताई आपत्ति… रांची, 28 अगस्त

Ranchi News: 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महारैली का विभिन्न संगठनों ने विरोध किया। परिसीमन, FCRA और डीलिस्टिंग मुद्दे पर जताई आपत्ति

Ranchi News: आदिवासी एकता महारैली का विरोध, 30 अगस्त की रैली पर संगठनों ने जताई आपत्ति…

रांची, 28 अगस्त 2026: परिसीमन, एफसीआरए और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों को लेकर 30 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महारैली को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने महारैली पर आपत्ति जताते हुए इसके विरोध का ऐलान किया।

प्रेस वार्ता में संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आदिवासी एकता के नाम पर प्रस्तावित इस महारैली के पीछे चर्च की रणनीति और प्रभाव है। हालांकि, ये आरोप प्रेस वार्ता में शामिल संगठनों की ओर से लगाए गए हैं।

केंद्रीय सरना समिति ने किया महारैली का विरोध

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि संगठन महारैली का विरोध करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली के माध्यम से आदिवासी समाज को कुछ ऐसे मुद्दों पर एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है, जिनके पीछे चर्च का प्रभाव और रणनीति बताई जा रही है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अस्तित्व, अस्मिता, अधिकार और आरक्षण से जुड़े विषयों पर फैसला समाज के लोगों की सहमति और व्यापक चर्चा के बाद होना चाहिए।

परिसीमन, FCRA और डीलिस्टिंग पर जताई आपत्ति

प्रेस वार्ता में संगठनों ने परिसीमन, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।

संगठनों के प्रतिनिधियों के मुताबिक, परिसीमन के मुद्दे के जरिए आदिवासी आरक्षित सीटों में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा की जा रही है। वहीं, एफसीआरए के माध्यम से विदेशी फंडिंग और धर्मांतरित आदिवासियों की डीलिस्टिंग का मुद्दा भी महारैली में उठाए जाने की बात कही जा रही है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि इन विषयों को लेकर आदिवासी समाज के बीच व्यापक विमर्श होना चाहिए और किसी भी निर्णय में समाज की सहमति महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

‘बाहरी नेतृत्व या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं’

बबलू मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों, परंपराओं, अस्मिता और आरक्षण से जुड़े मामलों में बाहरी नेतृत्व या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज से जुड़े संवेदनशील विषयों पर राजनीति या किसी अन्य प्रभाव के बजाय समाज के भीतर संवाद और सहमति की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

धर्मांतरण और आरक्षण का मुद्दा भी उठाया

प्रेस वार्ता के दौरान संगठनों ने धर्मांतरण तथा धर्मांतरित ईसाइयों को मिलने वाली सुविधाओं और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को भी अपनी चिंताओं में शामिल किया।

प्रतिनिधियों ने कहा कि इन विषयों को लेकर आदिवासी समाज के बीच गंभीर और व्यापक चर्चा की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि समाज के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

30 अगस्त की रैली को लेकर बढ़ी हलचल

मोरहाबादी मैदान में 30 अगस्त को प्रस्तावित आदिवासी एकता महारैली के विरोध में विभिन्न संगठनों के सामने आने के बाद रांची में इस मुद्दे को लेकर सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

प्रेस वार्ता में मुख्य पाहन जगलाल पाहन, अशोक मुंडा, संदीप उरांव, मेघा उरांव समेत विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

फिलहाल, महारैली को लेकर समर्थक और विरोधी पक्षों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। ऐसे में 30 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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