रांची में आदिवासी एकता महाजुटान: परिसीमन के विरोध में मोरहाबादी मैदान में उमड़ा जनसैलाब, गूंजा ‘अब नहीं तो कभी नहीं’

रांची के मोरहाबादी मैदान में परिसीमन के विरोध में आदिवासी एकता महाजुटान हुआ। आयोजकों ने एक लाख लोगों के जुटने का दावा किया। जानें रैली में क्या मांगें उठीं… रांची में आदिवासी एकता महाजुटान: परिसीमन के विरोध में मोरहाबादी मैदान में उमड़ा जनसैलाब… रांची, 30

रांची के मोरहाबादी मैदान में परिसीमन के विरोध में आदिवासी एकता महाजुटान हुआ। आयोजकों ने एक लाख लोगों के जुटने का दावा किया। जानें रैली में क्या मांगें उठीं

रांची में आदिवासी एकता महाजुटान: परिसीमन के विरोध में मोरहाबादी मैदान में उमड़ा जनसैलाब

रांची, 30 अगस्त 2026। प्रस्तावित परिसीमन के विरोध में रविवार को राजधानी रांची का ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान आदिवासी समाज के बड़े जुटान का गवाह बना। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ में झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजकों ने करीब एक लाख लोगों के जुटने का दावा किया।

सुबह से ही मोरहाबादी मैदान में महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की भीड़ जुटने लगी। ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने कहा कि वे आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को लेकर रांची पहुंचे हैं।

हेमंत सोरेन नहीं पहुंचे, विधायक विकास कुमार मुंडा ने की शिरकत

महाजुटान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी आमंत्रित किया गया था। हालांकि वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उनकी ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक विकास कुमार मुंडा ने कार्यक्रम में प्रतिनिधित्व किया।

रैली में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, के. राजू, रामेश्वर उरांव, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सुबोध कांत सहाय, सुखदेव भगत, विधायक राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगाड़ी और ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया समेत कई नेताओं ने संबोधित किया।

परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंता

महाजुटान में वक्ताओं ने प्रस्तावित परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि परिसीमन में केवल वर्तमान जनसंख्या को आधार बनाने के बजाय झारखंड की ऐतिहासिक परिस्थितियों, विस्थापन और आदिवासी बहुल क्षेत्रों की विशेष स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

आयोजकों और वक्ताओं ने आशंका जताई कि यदि केवल जनसंख्या अनुपात को आधार बनाया गया तो विधानसभा और लोकसभा में आदिवासी प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। झारखंड विधानसभा में वर्तमान में 28 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं, जबकि लोकसभा में पांच सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं।

क्या है परिसीमन?

परिसीमन का अर्थ लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण है। संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत जनगणना के बाद संसद कानून बनाकर परिसीमन की प्रक्रिया का प्रावधान करती है।

रैली में मांग उठाई गई कि झारखंड में परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान जनसंख्या के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों की ऐतिहासिक परिस्थितियों और विशेष संवैधानिक प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाए। जरूरत पड़ने पर संबंधित संवैधानिक प्रावधानों में संशोधन की मांग भी उठाई गई।

ग्रामीणों और महिलाओं की बड़ी भागीदारी

मोरहाबादी मैदान में जुटी भीड़ में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण और आम नागरिक भी नजर आए। कई लोग दूर-दराज के गांवों से अपने स्तर पर यात्रा कर कार्यक्रम में पहुंचे।

महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। कई समूहों ने सामूहिक रूप से यात्रा का खर्च जुटाया और अपने साथ भोजन-पानी लेकर रांची पहुंचे। इससे कार्यक्रम में सामाजिक भागीदारी का व्यापक स्वरूप देखने को मिला।

मंच से गूंजा ‘अब नहीं तो कभी नहीं’

महाजुटान के दौरान वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन का मुद्दा केवल विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, पहचान और अधिकारों से जुड़ा मामला है।

मंच से नेताओं ने आदिवासी समाज से एकजुट रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान ‘अब नहीं तो कभी नहीं’ का नारा भी गूंजता रहा।

आयोजकों ने कहा कि मोरहाबादी मैदान का यह जुटान सरकार और राजनीतिक दलों तक आदिवासी समाज की चिंताओं को पहुंचाने का प्रयास है। परिसीमन को लेकर आगे भी आंदोलन और जनजागरूकता अभियान जारी रखने की बात कही गई।

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