Ranchi News: रांची में ‘Voter Registration and Registers 2026’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। 800+ संस्थानों से मिले 230 शोध-सार में 58 शोध-पत्र चुने गए।
Jharkhand News: रांची में Voter Registration 2026 सम्मेलन शुरू, 58 शोध-पत्रों पर होगा मंथन
Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘Voter Registration and Registers 2026’ का बुधवार को शुभारंभ हुआ। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन NUSRL रांची में हो रहा है।
सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची की शुद्धता, समावेशन, तकनीक, डेटा प्रबंधन और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ विचार-विमर्श कर रहे हैं।
800 से ज्यादा संस्थानों से संपर्क, मिले 230 शोध-सार
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्य की जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन के लिए देश-विदेश के 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया था। इसके बाद 230 शोध-सार प्राप्त हुए।
स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने इनमें से 80 शोध-सार को शॉर्टलिस्ट किया। अंतिम रूप से 58 शोध-पत्रों को प्रकाशन और सम्मेलन में विचार-विमर्श के लिए चुना गया है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल वर्तमान में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता पंजीकरण की पूरी व्यवस्था पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर व्यापक अकादमिक विमर्श करना है।
मतदाता सूची में शुद्धता और समावेशन पर जोर
के. रवि कुमार ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह जरूरी है कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम दर्ज न रहे।
उन्होंने बताया कि दुनिया के अलग-अलग देशों में सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियां इस्तेमाल की जा रही हैं। कई देशों में जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक जानकारी और लगातार अपडेट होने वाली व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा रहा है।
भारत में मतदाता सूची प्रबंधन मजबूत संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के तहत होता है। इसमें क्षेत्रीय सत्यापन और राजनीतिक दलों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
तकनीक और AI के इस्तेमाल पर भी चर्चा
सम्मेलन में मतदाता सूची प्रबंधन में तकनीक और डेटाबेस आधारित सत्यापन की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीक के जरिए मतदाता रिकॉर्ड में संभावित विसंगतियों की पहचान और सूची की शुद्धता में सुधार किया जा सकता है।
इसके साथ ही डेटा की निजता, तकनीक की विश्वसनीयता, सुगम्यता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसी चुनौतियों पर भी विचार किया जा रहा है।
युवाओं और प्रवासियों की भागीदारी भी अहम
NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार है। विश्वसनीय चुनाव के लिए शुद्ध, समावेशी और नियमित रूप से अपडेट होने वाली मतदाता सूची जरूरी है।
सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय मतदाता जागरूकता, कैंपस आधारित पंजीकरण अभियान और नागरिक शिक्षा के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने बढ़ते प्रवासन, शहरीकरण और तकनीकी बदलाव के बीच युवा मतदाताओं, प्रवासियों और वंचित समुदायों की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
SIR से आगे भविष्य की निर्वाचन व्यवस्था पर मंथन
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को एक मंच पर लाने का अवसर मिला है।
अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की पूरी प्रक्रिया के केंद्र में नागरिक और मतदाता होते हैं। इसलिए शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है।
उन्होंने झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो।
शोध-पत्रों के निष्कर्ष डिजिटल रूप में भी होंगे उपलब्ध
सम्मेलन में चयनित 58 शोध-पत्रों और दो दिनों के विचार-विमर्श से सामने आने वाले महत्वपूर्ण निष्कर्षों को भौतिक और निःशुल्क डिजिटल स्वरूप में प्रकाशित किया जाएगा। इसका उद्देश्य भविष्य के शोधकर्ताओं और निर्वाचन प्रशासन के लिए एक उपयोगी ज्ञान-संसाधन तैयार करना है।
उद्घाटन सत्र में ये लोग रहे मौजूद
उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल, सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर समेत शिक्षाविद्, शोधकर्ता और निर्वाचन विशेषज्ञ मौजूद रहे।



