EB-5 Visa के लिए भारतीयों ने चीन को पीछे छोड़ा। 3 साल में 12,900 भारतीय आवेदन, EB-1 का कोटा समय से पहले खत्म और Trump Gold Card की पूरी जानकारी जानें।
EB-5 Visa: अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए चीन से आगे निकले भारतीय, 12,900 आवेदन; जानें Gold Card और EB-1
नई दिल्ली। अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में भारतीयों की बढ़ती दिलचस्पी का एक बड़ा संकेत सामने आया है। अमेरिका के EB-5 वीजा प्रोग्राम के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों की संख्या अब चीन से आगे निकल गई है। पिछले तीन वर्षों में करीब 12,900 भारतीयों ने EB-5 के लिए आवेदन किया, जबकि चीन से करीब 9,875 आवेदन आए।
EB-5 अमेरिका का एक ऐसा इमिग्रेशन प्रोग्राम है, जिसके तहत विदेशी निवेशक अमेरिका में निर्धारित राशि निवेश करके स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं। मौजूदा गणना के अनुसार इसके लिए करीब 7.5 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होती है।
EB-5 Visa क्या है और इससे ग्रीन कार्ड कैसे मिलता है?
EB-5 Immigrant Investor Program के जरिए विदेशी नागरिक अमेरिका में निवेश कर स्थायी निवास हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि, सिर्फ EB-5 वीजा मिलने का मतलब अमेरिकी नागरिकता मिल जाना नहीं है।
आवेदक को पहले ग्रीन कार्ड से जुड़ी सभी जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसके बाद अमेरिका में स्थायी निवासी के तौर पर रहने और भविष्य में नागरिकता के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया अलग होती है।
H-1B वीजा से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं में सख्ती के बीच कुछ भारतीयों के लिए EB-5 एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर आकर्षण का केंद्र बना है।
EB-1 Visa का कोटा समय से पहले हुआ खत्म
अमेरिका में EB-1 वीजा कैटेगरी की मांग भी इस साल काफी ज्यादा रही। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कैटेगरी का सालाना कोटा निर्धारित समय से करीब एक महीने पहले ही पूरा हो गया।
EB-1 कैटेगरी में असाधारण क्षमता वाले प्रोफेशनल्स के अलावा प्रोफेसर, वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर जैसे लोग भी आवेदन कर सकते हैं।
इस साल EB-1 का कोटा 1 सितंबर को ही पूरा हो गया, जबकि सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलनी थी। समय से पहले कोटा खत्म होना इस कैटेगरी की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
Trump Gold Card क्या है?
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 2025 में Gold Card Scheme शुरू की थी। इसे EB-5 के विकल्प के तौर पर पेश किया गया था। इसका उद्देश्य ज्यादा संपत्ति वाले विदेशी नागरिकों को अमेरिका में निवेश के बदले स्थायी निवास हासिल करने का रास्ता उपलब्ध कराना था।
Gold Card के लिए करीब 9.5 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत बताई गई है। यानी यह EB-5 की तुलना में ज्यादा महंगा विकल्प है।
हालांकि, अभी तक Gold Card को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अप्रैल 2026 में वित्त मंत्री लटनिक के अनुसार, 338 लोगों ने Gold Card में रुचि दिखाई, इनमें से 165 लोगों ने आवेदन फीस जमा की, जबकि अब तक सिर्फ एक व्यक्ति को Gold Card जारी किया गया।
EB-5 और Gold Card में अंतर
| बिंदु | EB-5 | Gold Card |
|---|---|---|
| मुख्य आधार | निवेश | निवेश |
| अनुमानित निवेश | करीब 7.5 करोड़ रुपये | करीब 9.5 करोड़ रुपये |
| उद्देश्य | ग्रीन कार्ड की राह | स्थायी निवास की राह |
| आवेदन की स्थिति | भारतीयों में बढ़ती दिलचस्पी | अब तक सीमित सफलता |
Gold Card की कानूनी स्थिति पर भी सवाल
Trump Gold Card को लेकर एक बड़ा सवाल इसकी कानूनी और नीतिगत स्थिरता को लेकर है। इसे राष्ट्रपति के तौर पर ट्रंप की कार्यकारी शक्तियों के इस्तेमाल से शुरू किया गया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर भविष्य में राष्ट्रपति बदलते हैं तो इस योजना का क्या होगा। राजनीतिक और कानूनी स्तर पर यह चर्चा बनी हुई है कि आने वाली सरकार इस योजना को जारी रखेगी या इसमें बदलाव करेगी।
अमेरिका में 144 अप्रवासी अरबपतियों में 19 भारतवंशी
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आर्थिक मौजूदगी भी लगातार मजबूत हुई है। Forbes की 2026 की अमेरिका के सबसे अमीर अप्रवासियों की सूची में कुल 144 अप्रवासी अरबपति शामिल हैं। इनमें 19 भारत में जन्मे अरबपति हैं।
इन 19 भारतीय मूल के अरबपतियों की कुल संपत्ति करीब 207 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।
भारतीय मूल के अरबपतियों में विनोद खोसला सबसे ऊपर हैं और सूची में 13वें स्थान पर हैं। वहीं जय चौधरी करीब 8.2 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ 25वें स्थान पर हैं।
एक साल में जुड़े 7 नए भारतवंशी अरबपति
पिछले साल इस सूची में भारत में जन्मे करीब 12 अरबपति शामिल थे। 2026 की सूची में यह संख्या बढ़कर 19 हो गई है। यानी एक साल में सात नए भारतवंशी नाम इस सूची में शामिल हुए।
नए नामों में हेमंत तनेजा, संजय गजेंद्र, जितेंद्र मोहन और श्याम शंकर समेत अन्य कारोबारी शामिल हैं।
अमेरिका के सबसे अमीर लोगों की सूची में एलन मस्क पहले, सर्गेई ब्रिन दूसरे और जेनसन हुआंग तीसरे स्थान पर हैं। भारतीय मूल के प्रमुख टेक लीडर्स सत्य नडेला और सुंदर पिचाई के नाम भी इस व्यापक सूची में शामिल हैं।
भारतीयों के लिए क्यों बढ़ रहा है EB-5 का आकर्षण?
EB-5 के लिए भारतीय आवेदकों की बढ़ती संख्या के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। अमेरिका में लंबे समय से काम कर रहे भारतीयों के लिए H-1B से ग्रीन कार्ड तक का रास्ता लंबा हो सकता है। ऐसे में निवेश आधारित इमिग्रेशन प्रोग्राम कुछ लोगों को वैकल्पिक विकल्प देता है।
इसके अलावा EB-5 में निवेश के जरिए परिवार के लिए अमेरिका में स्थायी निवास की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना भी इसे हाई-नेट-वर्थ भारतीयों के बीच आकर्षक बनाती है।



