JSSC-CGL पेपर लीक: अभय तिवारी का लोकेशन दुगदा-बोकारो में मिला, 3.80 लाख के बैंक ट्रेल की जांच

रांची, 6 अक्टूबर: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL-2023 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता की जांच कर रही सीआईडी को अभय कुमार तिवारी से जुड़े मामले में कई अहम सुराग मिले हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सीआईडी

रांची, 6 अक्टूबर: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL-2023 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता की जांच कर रही सीआईडी को अभय कुमार तिवारी से जुड़े मामले में कई अहम सुराग मिले हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सीआईडी अभय तिवारी की भूमिका और परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

सीआईडी की जांच के अनुसार, अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को भी मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों पर परीक्षा में कथित अनियमितताओं से लाभ लेने और मामले से जुड़े होने के आरोप हैं।

चास के बाद दुगदा और बोकारो में मिला लोकेशन

जांच में अभय तिवारी के मोबाइल नंबर के सीडीआर और टावर लोकेशन को भी खंगाला गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 21 सितंबर 2024 को उसका लोकेशन पहले चास और इसके बाद दुगदा, बोकारो क्षेत्र में मिला था।

सीआईडी इस लोकेशन को उन आरोपों से जोड़कर देख रही है, जिनमें परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को एक स्थान पर जुटाकर कथित तौर पर प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने और उन्हें याद कराने की बात सामने आई है। अन्य रिपोर्टों में भी जांच के दौरान अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले बोकारो ले जाकर प्रश्न-उत्तर रटाए जाने की बात सामने आई है।

3.80 लाख रुपये के बैंक ट्रेल की जांच

जांच में एक बैंक ट्रांजैक्शन भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी विजय कुमार तिवारी की पत्नी सीमा कुमारी के बैंक खाते से अभय कुमार तिवारी के खाते में कुल 3.80 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

सीआईडी इस बैंक ट्रेल को परीक्षा में कथित सेटिंग और पेपर लीक नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

पत्नी और भाई भी जांच के दायरे में

सीआईडी ने अगस्त में अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया था। दोनों से परीक्षा में कथित अनियमितताओं और अभय तिवारी से उनके संबंधों को लेकर पूछताछ की गई। बाद में दोनों की जमानत याचिका भी निचली अदालत ने खारिज कर दी थी।

जांच एजेंसी अब कथित पेपर लीक नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, पैसों के लेन-देन और परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक प्रश्न-उत्तर पहुंचने की पूरी कड़ी को खंगाल रही है। मामले में कई अभ्यर्थियों और अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा चुकी है।

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