EMI का बोझ बढ़ा रहा कर्ज का जाल! 35 साल से कम उम्र के युवाओं पर ज्यादा दबाव, ऐसे पहचानें खतरे के संकेत

EMI और कर्ज का बढ़ता दबाव युवाओं के लिए चिंता की वजह बन रहा है। जानिए कर्ज के खतरे के संकेत, क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन से बचने के तरीके और EMI मैनेज करने के उपाय.. नई दिल्ली: आज के समय में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, क्रेडिट

EMI और कर्ज का बढ़ता दबाव युवाओं के लिए चिंता की वजह बन रहा है। जानिए कर्ज के खतरे के संकेत, क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन से बचने के तरीके और EMI मैनेज करने के उपाय..

नई दिल्ली: आज के समय में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन और दूसरी महंगी चीजें EMI पर खरीदना आसान हो गया है। लेकिन आसान कर्ज कई बार वित्तीय दबाव भी बढ़ा सकता है। अगर किसी व्यक्ति की आय का बड़ा हिस्सा हर महीने EMI में चला रहा है, बचत खत्म हो रही है और पुराने कर्ज की किस्त चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ रहा है, तो यह आर्थिक स्थिति की समीक्षा करने का संकेत है।

कर्ज के बोझ में कितनी बढ़ोतरी हुई?

ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय रूप से अत्यधिक कर्ज के बोझ वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016-17 में 5% से बढ़कर 2023-24 में 18% तक पहुंच गई थी। बाद में यह घटकर करीब 15% हुई।

चिंता की बात यह है कि 35 साल से कम उम्र के लोगों में क्रेडिट की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। यह आयु वर्ग भारत के कुल क्रेडिट बाजार का करीब 39% हिस्सा रखता है।

कर्ज का बढ़ता दबाव

आंकड़ास्थिति
अत्यधिक कर्ज बोझ वाले उपभोक्ता 2016-175%
अत्यधिक कर्ज बोझ वाले उपभोक्ता 2023-2418%
बाद की हिस्सेदारी15%
35 साल से कम उम्र वालों की क्रेडिट बाजार में हिस्सेदारी39%
औसत स्मार्टफोन कीमतकरीब ₹38,000
उपभोग आधारित क्रेडिट उत्पाद रखने वाले सक्रिय उधारकर्ता34% से बढ़कर 51%

युवाओं में पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा

कर्ज के बढ़ते दबाव में पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंस की बड़ी भूमिका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन उत्पादों वाले सक्रिय उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 34% से बढ़कर 51% हो गई।

इसका मतलब है कि कर्ज का इस्तेमाल अब केवल घर, वाहन या कारोबार जैसी बड़ी जरूरतों तक सीमित नहीं है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, छुट्टियां और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्च भी EMI या क्रेडिट के जरिए किए जा रहे हैं।

कैसे पता चले कि EMI आपकी क्षमता से बाहर जा रही है?

कर्ज लेना अपने आप में गलत नहीं है। असली समस्या तब शुरू होती है जब कर्ज आपकी नियमित आय और जरूरी खर्चों पर दबाव डालने लगे।

इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • आय का बहुत बड़ा हिस्सा हर महीने EMI में चला जाना।
  • पुरानी EMI चुकाने के लिए नया कर्ज लेना।
  • क्रेडिट कार्ड के बकाये का भुगतान लगातार टालना।
  • बचत लगभग खत्म हो जाना।
  • अचानक आने वाले खर्चों के लिए बार-बार क्रेडिट पर निर्भर रहना।
  • महीने की शुरुआत में ही आय का बड़ा हिस्सा कर्ज में चला जाना।

ध्यान दें: 50% EMI अनुपात को यहां एक सामान्य चेतावनी संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, कोई सार्वभौमिक कानूनी या बैंकिंग सीमा नहीं। हर व्यक्ति की आय, जरूरी खर्च और कर्ज की स्थिति अलग होती है।

कर्ज के जाल से निकलने के लिए क्या करें?

सबसे पहले अपनी पूरी वित्तीय स्थिति लिखकर सामने रखें। सभी लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, ब्याज दर और मासिक EMI की सूची बनाएं।

इसके बाद:

1. महंगे कर्ज की पहचान करें
जिस कर्ज पर ब्याज ज्यादा है, उसे प्राथमिकता देना उपयोगी हो सकता है।

2. नया गैर-जरूरी कर्ज लेने से बचें
पुरानी EMI चुकाने के लिए लगातार नया कर्ज लेना स्थिति को और मुश्किल बना सकता है।

3. खर्चों की समीक्षा करें
कुछ समय के लिए गैर-जरूरी खर्चों को कम करके कर्ज चुकाने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

4. लोन कंसोलिडेशन को समझकर ही चुनें
कई कर्जों को एक लोन में मिलाने का विकल्प कुछ मामलों में उपयोगी हो सकता है, लेकिन ब्याज, अवधि, प्रोसेसिंग फीस और कुल भुगतान की तुलना जरूरी है।

EMI कम करने के लिए बैंक से कब बात करें?

अगर लगता है कि भविष्य में EMI चुकाना मुश्किल हो सकता है, तो भुगतान में चूक होने का इंतजार करने के बजाय संबंधित बैंक या ऋणदाता से बात करना बेहतर है।

कुछ मामलों में लोन की अवधि बढ़ाने या पुनर्गठन जैसे विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। लेकिन इससे कुल ब्याज और कुल भुगतान बढ़ सकता है। इसलिए केवल कम EMI देखकर फैसला न लें।

निष्कर्ष

EMI सुविधा देती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर खरीदारी को कर्ज के जरिए करना सही है। कर्ज की कुल लागत, मासिक भुगतान और अपनी आय के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। खासकर युवाओं के लिए क्रेडिट उपलब्ध होने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


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