बिहार में पेपर लीक, परीक्षा में कथित धांधली और लंबित भर्ती परीक्षाओं के खिलाफ पटना में अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। पप्पू यादव ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया…
पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर अलग-अलग संगठनों से जुड़े अभ्यर्थी पेपर लीक, परीक्षा में कथित धांधली, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और लंबित परीक्षाओं को जल्द कराने समेत कई मांगों को लेकर धरना और अनशन कर रहे हैं। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भी आंदोलनरत अभ्यर्थियों के समर्थन में एक दिन का उपवास किया।
13 दिनों से आमरण अनशन पर Ph.D. होल्डर और रिसर्च स्कॉलर
‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले अभ्यर्थी पिछले 13 दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि बिहार में उच्च शिक्षा और सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से जुड़े नियमों में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे शोधार्थियों और वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे अभ्यर्थियों के सामने अवसर कम होने की आशंका है।
अभ्यर्थी सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 में संशोधन की मांग कर रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर ABSU की 13 सूत्री मांगें
‘ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU)’ ने प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी 13 सूत्री मांगें सामने रखी हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और कथित पेपर लीक व अनियमितताओं के मामलों में जिम्मेदारी तय करना शामिल है।
अभ्यर्थियों ने 70वीं BPSC परीक्षा को निरस्त करने, BSSC इंटरमीडिएट, CGL, ASO और BSO सहित लंबित परीक्षाओं को जल्द आयोजित कराने की मांग की है।
इसके अलावा TRE-4 भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा करने और ‘एक परीक्षा, एक अभ्यर्थी, एक रिजल्ट’ जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी गई है।
दरोगा भर्ती परीक्षा को लेकर भी उठी मांग
आंदोलनकारियों ने 1,799 पदों वाली दरोगा भर्ती परीक्षा को निरस्त करने की मांग की है। साथ ही उनका कहना है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र, उत्तर-कुंजी और OMR शीट उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
BPSC की AEDO समेत विभिन्न रद्द परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग भी आंदोलन में उठाई गई है।
पप्पू यादव ने किया अभ्यर्थियों का समर्थन
आंदोलनरत अभ्यर्थियों के समर्थन में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी एक दिन के उपवास पर बैठे। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों के मुद्दों को जल्द हल करने की जरूरत बताई।
सहायक प्राध्यापक नियमावली 2026 का क्यों हो रहा विरोध?
Ph.D. होल्डर और रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि नई नियमावली में कई प्रावधान उनके हितों के खिलाफ हैं। उनके मुताबिक, बिहार के विश्वविद्यालयों में लंबे समय से सहायक प्राध्यापकों की नियमित नियुक्ति पर्याप्त संख्या में नहीं हुई है।
अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब तीन दशक में विश्वविद्यालयों में केवल कुछ ही बार सहायक प्राध्यापकों की बहाली हुई है। उनका कहना है कि नियमित नियुक्ति की जगह संविदा आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देना उचित नहीं है।
उम्र सीमा और रिसर्च पब्लिकेशन पर भी आपत्ति
आंदोलनकारियों के मुताबिक नई नियमावली में अधिकतम उम्र सीमा को 55 वर्ष से घटाकर 40 वर्ष किए जाने पर भी आपत्ति है। उनका कहना है कि इससे लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में काम कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
इसके अलावा रिसर्च पब्लिकेशन के अंकों को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पिछली नियुक्ति प्रक्रिया में UGC के टेबल 3A के तहत रिसर्च पब्लिकेशन को अंक दिए जाते थे। संगठन इस प्रावधान को लेकर भी संशोधन की मांग कर रहा है।
आंदोलन का मुख्य मुद्दा क्या?
फिलहाल पटना में चल रहे आंदोलन में दो प्रमुख मुद्दे दिखाई दे रहे हैं—प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और उच्च शिक्षा में नियुक्ति व्यवस्था। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाए तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करे।



