CEA वी. अनंत नागेश्वरन ने पुराने वाहनों के लिए E20 के साथ E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। जानें कार्ब्यूरेटर वाले दोपहिया वाहनों को लेकर क्या चिंता है…
E20 Petrol: पुराने वाहनों के लिए फिर मिलेगा E10 पेट्रोल? CEA वी. अनंत नागेश्वरन ने दिया सुझाव
E20 Petrol News: भारत में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने पुराने वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 पेट्रोल का विकल्प फिर से उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इससे पुराने वाहनों, खासकर कार्ब्यूरेटर वाले दोपहिया वाहनों को संभावित नुकसान से बचाने और E20 पेट्रोल को लेकर लोगों की चिंताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
नागेश्वरन ने फिलहाल E20 से आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले इसके लागत और लाभ का विस्तृत विश्लेषण करने की भी बात कही है।
E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने के दावों पर क्या बोले CEA?
द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में नागेश्वरन ने E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को व्यापक नुकसान पहुंचने के दावों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक और परीक्षण संबंधी प्रमाण इन आशंकाओं का व्यापक समर्थन नहीं करते।
उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के दावे किए गए हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े इन दावों से अलग तस्वीर पेश करते हैं।
E20 पेट्रोल से माइलेज पर कितना असर?
वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में करीब दो-तिहाई ऊर्जा सामग्री होती है। इसलिए E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन की ईंधन दक्षता पर कुछ असर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि यह प्रभाव करीब 7 प्रतिशत तक हो सकता है। यानी E20 के कारण माइलेज में कमी संभव है, लेकिन सोशल मीडिया पर किए जा रहे कुछ बड़े दावों के मुकाबले वास्तविक असर सीमित है।
पुराने दोपहिया वाहनों को लेकर क्यों जताई चिंता?
CEA ने भारत में बड़ी संख्या में चल रहे पुराने दोपहिया वाहनों को लेकर विशेष चिंता जताई है। उनके अनुसार देश में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन अभी भी चल रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की है जो BS-IV मानकों से पहले बनाए गए थे और कार्ब्यूरेटर तकनीक पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे वाहनों के लिए E20 पेट्रोल का इस्तेमाल अलग तरह की चुनौतियां पैदा कर सकता है।
कार्ब्यूरेटर वाले वाहनों के लिए E20 क्यों चुनौतीपूर्ण?
नागेश्वरन के मुताबिक कार्ब्यूरेटर आधारित इंजन एथेनॉल मिश्रित ईंधन में मौजूद अतिरिक्त ऑक्सीजन के अनुरूप खुद को उसी तरह समायोजित नहीं कर पाता। इससे इंजन में ईंधन और हवा का अनुपात प्रभावित हो सकता है और इंजन अपेक्षाकृत अधिक गर्म होकर चल सकता है।
इसके अलावा पुराने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रबर सील और अन्य पुर्जे लंबे समय तक एथेनॉल के संपर्क में रहने से प्रभावित हो सकते हैं।
E10 पेट्रोल दोबारा उपलब्ध कराने की मांग
नागेश्वरन ने बताया कि सरकार के शुरुआती एथेनॉल मिश्रण रोडमैप में पुराने वाहनों के लिए कम मिश्रण वाले ईंधन का विकल्प उपलब्ध रखने की बात कही गई थी। हालांकि समय के साथ अधिकांश पेट्रोल पंपों पर यह विकल्प लगभग खत्म हो गया।
उन्होंने सुझाव दिया कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ E10 पेट्रोल भी दोबारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उनके अनुसार इससे तीन प्रमुख फायदे हो सकते हैं—पुराने वाहन मालिकों की चिंताएं कम होंगी, पुराने वाहन बेड़े को सुरक्षा मिलेगी और जरूरत पड़ने पर रेट्रोफिटिंग कार्यक्रम लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
E20 से आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर भी विचार
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने E20 से आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले इसके आर्थिक और व्यावहारिक प्रभावों का लागत-लाभ विश्लेषण करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
E20 नीति को लेकर आगे की दिशा तय करते समय पुराने वाहनों, ईंधन दक्षता, वाहन तकनीक और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।



