नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: सुप्रीम कोर्ट परिसर तक विपक्षी नेताओं के मार्च और वहां जुटने के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी अदालत को डराकर या धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। कोर्ट ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत 16 नेताओं को नोटिस जारी किया है। साथ ही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और अंदर क्या हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं रहती और उसे घटनाक्रम की जानकारी है। CJI ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल उठाने और उससे सफाई मांगे जाने की बात भी कही।
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी समेत 16 नेताओं को नोटिस जारी किया
यह मामला 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विपक्षी मार्च और कोर्ट परिसर में नेताओं तथा समर्थकों के पहुंचने से जुड़ा है। इस घटना को लेकर चार वकीलों ने याचिका दाखिल की थी।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन रोकने के लिए नियम बनाने, घटना से संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और मार्च के आयोजकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अदालत परिसर की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संबंधित नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
CJI सूर्यकांत बोले- हमें हर बात की जानकारी है
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालत पर दबाव बनाने की कोशिशों को लेकर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोई भी कोर्ट को धमकाकर अपने पक्ष में फैसला नहीं करा सकता।
CJI ने कहा, “हमें पता है कि कोर्ट के बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के अंदर क्या कहा जा रहा है। हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर सवाल उठाए जाएंगे और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान घटना से संबंधित CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग उठाई गई। वकील गौरव भाटिया ने अदालत से अंतरिम आदेश देने का आग्रह किया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के बाहर मार्च के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला पत्रकार को धक्का दिया था। यह आरोप है, जिसकी पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और जांच के आधार पर होनी है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने संबंधित कानूनी एजेंसियों को CCTV और अन्य डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित सामग्री कोई भी व्यक्ति जमा करा सकता है।
प्रदर्शन के आयोजकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले लोगों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका तर्क है कि किसी प्रदर्शन के कारण दूसरे लोगों, संस्थानों या न्यायिक कार्यवाही पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने की मांग भी की गई है। अदालत की ओर से जारी नोटिस के बाद संबंधित पक्षों का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
CJI को ज्ञापन देने से इनकार के बाद निकाला गया था मार्च
रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने 11 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था और ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी। हालांकि, उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला।
इसके बाद 12 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने दिल्ली के बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। मार्च के बाद विपक्षी नेता और उनके समर्थक सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचे।
इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। अब अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान सुरक्षा, अनुशासन और विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।
केरल कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उठा सवाल
सुनवाई के दौरान केरल कांग्रेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में दावा किया गया कि पोस्ट मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ थी और इसे अदालत की अवमानना माना जाना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित पोस्ट को बाद में हटा दिया गया। हालांकि, पोस्ट के संबंध में किसी संभावित अवमानना कार्रवाई पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले अदालत की आधिकारिक कार्यवाही और आदेश देखना जरूरी होगा।
SIR और चुनाव आयोग के फैसलों पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के फैसलों को लेकर भी सवाल उठाए गए। विपक्षी नेताओं और याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत बताई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति जताई थी। इसमें फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच तथा काम के बंटवारे जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों का अध्ययन जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में भी केंद्र को नोटिस
इसी घटनाक्रम के बीच CJP के प्रदर्शन से जुड़े मामले में भी सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
इस मामले में प्रदर्शनकारियों के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नोटिस के बाद राहुल गांधी समेत संबंधित नेताओं और अन्य पक्षों को अपना जवाब देना होगा। CCTV फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है।
अब इस प्रकरण में अदालत की अगली सुनवाई, संबंधित पक्षों के जवाब और आधिकारिक आदेशों पर नजर रहेगी। यह मामला न्यायिक परिसर की सुरक्षा, राजनीतिक विरोध के तरीके और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़े सवालों को सामने लाता है।



