Jharkhand News: सरना धर्मकोड को जनगणना में अलग विकल्प नहीं मिलने पर आदिवासी छात्र संघ ने जनगणना और परिसीमन के बहिष्कार की घोषणा की है। 18 सितंबर से गुमला में महारैली होगी…
Jharkhand News: सरना धर्मकोड नहीं तो जनगणना-परिसीमन का बहिष्कार, 18 सितंबर से आंदोलन…
Ranchi News: झारखंड में सरना धर्मकोड, जनगणना और परिसीमन को लेकर आदिवासी संगठनों की नाराजगी अब आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। आदिवासी छात्र संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी जनगणना में सरना धर्मकोड के लिए अलग विकल्प नहीं दिया गया, तो संगठन जनगणना के साथ-साथ परिसीमन प्रक्रिया के बहिष्कार का आह्वान करेगा।
आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय संयोजक डॉ. सुशील कुमार मिंज ने कहा कि आदिवासी समुदाय की अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जनगणना में दर्ज करने के लिए सरना धर्मकोड का अलग विकल्प जरूरी है। उनका कहना है कि अलग धर्मकोड के अभाव में आदिवासी आबादी का वास्तविक आंकड़ा स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाता, जिसका असर भविष्य में सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक हिस्सेदारी पर पड़ सकता है।
सरना धर्मकोड को लेकर आदिवासी छात्र संघ की मांग
डॉ. सुशील कुमार मिंज के अनुसार, आदिवासी समाज लंबे समय से सरना धर्मकोड की मांग करता रहा है। उनका कहना है कि जनगणना में धार्मिक पहचान दर्ज करने के लिए अलग विकल्प मिलने से आदिवासी समुदाय की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आगामी जनगणना में सरना धर्मकोड को अलग धार्मिक विकल्प के रूप में शामिल किया जाए। संघ का कहना है कि यह केवल धार्मिक पहचान का मुद्दा नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की सामाजिक और राजनीतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ विषय है।
जनगणना और परिसीमन के बीच संबंध का दावा
आदिवासी छात्र संघ ने जनगणना और प्रस्तावित परिसीमन को एक-दूसरे से जुड़ा मुद्दा बताया है। संगठन के मुताबिक जनसंख्या के आंकड़ों में बदलाव का असर भविष्य में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है।
डॉ. मिंज ने कहा कि यदि आदिवासी आबादी का सही आंकड़ा सामने नहीं आता है, तो इसका प्रभाव आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने की आशंका है। इसी वजह से संगठन सरना धर्मकोड को जनगणना में शामिल किए जाने को महत्वपूर्ण मान रहा है।
हालांकि, परिसीमन की प्रक्रिया और आरक्षण पर इसका वास्तविक प्रभाव संवैधानिक प्रावधानों और भविष्य में होने वाली आधिकारिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
18 सितंबर से गुमला में आंदोलन की शुरुआत
सरना धर्मकोड और परिसीमन के मुद्दे को लेकर आदिवासी छात्र संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संगठन के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 18 सितंबर 2026 को गुमला से महारैली के जरिए की जाएगी।
इस महारैली में सरना धर्मकोड को जनगणना में शामिल करने और प्रस्तावित परिसीमन के विरोध को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। संगठन ने कहा है कि आंदोलन को आगे चलकर अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।
आदिवासी छात्र संघ ने अपने आंदोलन के लिए नारा भी जारी किया है—
“सरना धर्मकोड नहीं तो जनगणना नहीं, जनगणना नहीं तो परिसीमन नहीं।”
संगठन का कहना है कि यह अभियान आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान, जनसंख्या के सही आंकड़े और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने लाने के लिए चलाया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण को लेकर चिंता
आदिवासी छात्र संघ का कहना है कि जनगणना के आंकड़े भविष्य की नीतियों और प्रशासनिक योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में आदिवासी समुदाय की आबादी से संबंधित आंकड़ों का सही तरीके से दर्ज होना जरूरी है।
संगठन ने आशंका जताई है कि जनसंख्या के आंकड़ों में बदलाव का असर भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। इसी कारण संघ परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज करा रहा है।
झारखंड में तेज हो सकती है आदिवासी राजनीति
सरना धर्मकोड का मुद्दा झारखंड में लंबे समय से आदिवासी समाज की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। अब जनगणना और परिसीमन को इसके साथ जोड़कर आंदोलन की घोषणा किए जाने से आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
18 सितंबर को गुमला से प्रस्तावित महारैली के बाद आंदोलन का स्वरूप क्या होगा और इसमें कितने संगठन शामिल होंगे, इस पर भी नजर रहेगी। फिलहाल आदिवासी छात्र संघ ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रूप से मांग की है कि जनगणना में सरना धर्मकोड के लिए अलग विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
संघ ने दोहराया है कि आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर वह अपना आंदोलन जारी रखेगा। संगठन का दावा है कि यदि मांग पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।



