Pakistan Political Crisis: लंदन में आसिफ जरदारी से मिले मोहसिन नकवी, 90 मिनट की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल

Pakistan Political Crisis: लंदन में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बीच 90 मिनट बैठक हुई। नए प्रांत और पाकिस्तान के राजनीतिक संकट पर चर्चा की अटकलें तेज हैं। Pakistan Political Crisis: लंदन में जरदारी-नकवी की 90 मिनट बैठक, नए प्रांतों

Pakistan Political Crisis: लंदन में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बीच 90 मिनट बैठक हुई। नए प्रांत और पाकिस्तान के राजनीतिक संकट पर चर्चा की अटकलें तेज हैं।

Pakistan Political Crisis: लंदन में जरदारी-नकवी की 90 मिनट बैठक, नए प्रांतों पर बढ़ी हलचल

लंदन: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के लंदन दौरे के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने उनसे मुलाकात की है। दोनों नेताओं के बीच करीब 90 मिनट तक बैठक हुई। बैठक ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान में नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

आसिफ अली जरदारी की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के समर्थन से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार चल रही है। हालांकि, हाल के दिनों में दोनों दलों के बीच मतभेद और तनातनी की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में जरदारी और नकवी की लंदन में हुई मुलाकात को पाकिस्तान की मौजूदा सियासी स्थिति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

असीम मुनीर का संदेश लेकर लंदन पहुंचे नकवी?

CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहसिन नकवी कथित तौर पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर का एक अहम संदेश लेकर लंदन पहुंचे थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैठक में पाकिस्तान के प्रांतों के संभावित पुनर्गठन और देश में उभरते राजनीतिक संकट को नियंत्रित करने के तरीकों पर चर्चा हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, नए प्रांत बनाने की दिशा में सेना की ओर से जोर दिए जाने की चर्चा है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति जरदारी पर दबाव होने की बात भी कही गई है।

नए प्रांत बनाने के मुद्दे पर क्या चाहते हैं जरदारी?

रिपोर्ट के मुताबिक, आसिफ अली जरदारी नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार हैं, लेकिन वह सिंध को इस प्रक्रिया से फिलहाल अलग रखना चाहते हैं। सिंध पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का प्रमुख राजनीतिक गढ़ माना जाता है।

बताया जा रहा है कि जरदारी चाहते हैं कि यदि नए प्रांत बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है तो इसकी शुरुआत पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से की जाए। इन क्षेत्रों में नए प्रांत बनाने से संबंधित प्रस्ताव पहले ही सामने आ चुके हैं।

सिंध और बलूचिस्तान को लेकर जरदारी की अलग रणनीति

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आसिफ जरदारी सिंध और बलूचिस्तान में तत्काल नए प्रांत बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। सिंध के विभाजन से PPP के राजनीतिक समीकरण प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

वहीं, बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति और जारी उग्रवादी हिंसा के कारण वहां प्रशासनिक पुनर्गठन का मुद्दा बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। यही वजह है कि जरदारी इस मामले में सावधानी बरतने के पक्ष में बताए जा रहे हैं।

नए प्रांतों की जगह प्रशासनिक इकाइयों पर हो सकता है फोकस

पाकिस्तान में तत्काल नए प्रांत बनाने के बजाय नई प्रशासनिक इकाइयों और स्थानीय सरकारों को मजबूत करने का विकल्प भी चर्चा में है। इससे केंद्र और प्रांतीय स्तर पर प्रशासनिक पुनर्गठन की शुरुआत की जा सकती है, जबकि नए प्रांत बनाने जैसे संवैधानिक और राजनीतिक रूप से कठिन फैसले को फिलहाल टाला जा सकता है।

लंदन में जरदारी और नकवी के बीच हुई बैठक के बाद पाकिस्तान की राजनीति में आगे की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर PPP और शहबाज शरीफ सरकार के रिश्तों तथा नए प्रांतों के मुद्दे पर आने वाले फैसलों पर सबकी नजर है।

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