Hemant Soren Threat Case: विश्वजीत समादार को रांची सिविल कोर्ट से जमानत मिली है। कोर्ट ने सोशल मीडिया संपर्क, मुख्यमंत्री के आवास जाने और आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक समेत कई शर्तें लगाई हैं।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित धमकी और आपत्तिजनक बयान देने के मामले में आरोपी विश्वजीत समादार को रांची सिविल कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि, अदालत ने जमानत देते समय ऐसी कई शर्तें लगाई हैं, जिनका उल्लंघन आरोपी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, जमानत अवधि में विश्वजीत समादार को मुख्यमंत्री से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क से दूर रहना होगा।
अदालत ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करने, मुख्यमंत्री के आवास या कार्यालय जाने और ऐसी किसी सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने पर भी रोक लगाई है, जिससे मुख्यमंत्री को परेशान करने, डराने या दो समूहों के बीच दुश्मनी पैदा होने की स्थिति बन सकती है।
सोशल मीडिया पर भी रहेगी पाबंदी
जमानत की अवधि के दौरान विश्वजीत समादार WhatsApp, Facebook, मैसेज या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने का प्रयास नहीं करेगा।
कोर्ट ने आरोपी को मुख्यमंत्री के आवास और कार्यस्थल से दूर रहने तथा उनकी निजता का उल्लंघन नहीं करने का निर्देश भी दिया है।
बयान, पोस्ट और कंटेंट को लेकर कोर्ट की सख्ती
अदालत की शर्तों के अनुसार, आरोपी ऐसा कोई बयान, टिप्पणी या अन्य सामग्री प्रकाशित, प्रसारित या फॉरवर्ड नहीं करेगा, जिसका उद्देश्य मुख्यमंत्री को परेशान करना, अपमानित करना या डराना हो अथवा जिससे दो समूहों के बीच दुश्मनी फैल सकती हो।
आरोपी को समाज में शांति बनाए रखने और अच्छा आचरण करने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा उसे मामले के जांच अधिकारी के साथ जांच में सहयोग करना होगा।
जमानत के लिए दो जमानतियों में से एक का आरोपी का निकट संबंधी होना भी जरूरी होगा।
शर्त टूटी तो फिर रद्द हो सकती है बेल
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन करता है या दोबारा इसी तरह का अपराध करता है, तो पुलिस उसकी जमानत रद्द कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकती है।
यानी जमानत मिलने के बावजूद आरोपी को कोर्ट की निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।
क्या है हेमंत सोरेन धमकी केस?
मामला रांची के कोतवाली थाना कांड संख्या 177/2026 से जुड़ा है। प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता सुजीत कुमार कुजूर ने आरोप लगाया था कि एक व्यक्ति मुख्यमंत्री के आवास में घुसने, उन्हें नुकसान पहुंचाने और हिंसा भड़काने जैसी बातें कर रहा था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कथित बयान JPSC और JSSC से जुड़े मुद्दे को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे आंदोलन के दौरान दिए गए थे।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने विश्वजीत समादार को 14 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामले में उसकी भूमिका और कथित गतिविधियों को लेकर जांच की गई।
फिलहाल अदालत से जमानत मिलने के बाद विश्वजीत समादार जेल से बाहर आ सकता है, लेकिन उसे अदालत की सभी शर्तों का पालन करना होगा। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।



