आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से तीन वर्षों में 1,505 करोड़ रुपये खर्च, 15 लाख रुपये तक पहुंचा स्वास्थ्य कवर
Ayushman Yojana Jharkhand: दस साल में बदली स्वास्थ्य सुरक्षा की तस्वीर, 9.50 लाख लोगों का इलाज….
झारखंड में आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से तीन वर्षों में 9.50 लाख लोगों का इलाज हुआ। इस पर 1,505 करोड़ रुपये खर्च हुए और स्वास्थ्य कवर 15 लाख तक पहुंचा।
रांची, 17 सितंबर: झारखंड में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ने पिछले एक दशक में गरीब और जरूरतमंद परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। इन दोनों योजनाओं के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2026-27 के दौरान अब तक करीब 9.50 लाख लाभार्थियों का इलाज किया गया है। इस पर लगभग 1,505 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा की यह व्यवस्था अब 30 हजार रुपये के शुरुआती बीमा कवर से बढ़कर 15 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य लाभ तक पहुंच चुकी है। गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज में यह व्यवस्था गरीब परिवारों के लिए आर्थिक राहत का बड़ा माध्यम बनी है।
तीन वर्षों में 9.50 लाख लोगों का इलाज
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2026-27 के बीच दोनों स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं के तहत करीब 9.50 लाख लोगों का उपचार हुआ है। इस दौरान लगभग 1,505 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
| वित्तीय वर्ष | इलाज कराने वाले लाभार्थी | खर्च |
|---|---|---|
| 2024-25 | करीब 3.70 लाख | लगभग 560 करोड़ रुपये |
| 2025-26 | करीब 3.80 लाख | लगभग 670 करोड़ रुपये |
| 2026-27 में अब तक | करीब 2 लाख | लगभग 275 करोड़ रुपये |
| कुल | करीब 9.50 लाख | लगभग 1,505 करोड़ रुपये |
इन आंकड़ों के अनुसार, प्रत्येक उपचार पर औसतन करीब 15,800 रुपये का खर्च हुआ है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 अभी जारी है।
30 हजार रुपये के कवर से 15 लाख तक का सफर
झारखंड में गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा की शुरुआत सीमित कवरेज से हुई थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना यानी आरएसबीवाई के तहत परिवारों को सालाना 30 हजार रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता था।
वर्ष 2015-16 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 16,82,894 सक्रिय आरएसबीवाई कार्ड थे। उस वित्तीय वर्ष में 13,686 अस्पताल में भर्ती उपचार दर्ज किए गए थे।
इसके बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना को मंजूरी दी गई, जिसके तहत परिवारों को दो लाख रुपये तक का बीमा कवर देने का प्रस्ताव था।
2018 में आयुष्मान भारत से आया बड़ा बदलाव
सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू होने के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया। इस योजना के तहत पात्र गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर देने की व्यवस्था की गई।
योजना के तहत सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। झारखंड में भी केंद्र की योजना के साथ राज्य की स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था को जोड़ा गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 तक झारखंड में 28,05,753 पात्र परिवार पीएमजेएवाई के दायरे में थे। इसके अलावा राज्य योजना के तहत 29,05,180 अतिरिक्त परिवारों को स्वास्थ्य लाभ दिया जा रहा था। इस तरह दोनों व्यवस्थाओं के माध्यम से करीब 57 लाख परिवारों तक स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार हुआ था।
कोरोना काल में भी जारी रहा उपचार
कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था पर काफी दबाव रहा। इसके बावजूद आयुष्मान व्यवस्था के तहत उपचार का सिलसिला पूरी तरह बंद नहीं हुआ।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सितंबर 2021 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में तब तक 9.37 लाख अस्पताल में भर्ती उपचार अधिकृत किए जा चुके थे। इनके लिए करीब 971 करोड़ रुपये की राशि अधिकृत हुई थी।
अक्टूबर 2021 तक अधिकृत उपचारों की संख्या लगभग 9.70 लाख और उपचार राशि करीब 1,013.72 करोड़ रुपये हो गई। जनवरी 2022 तक यह आंकड़ा 10.67 लाख अस्पताल भर्ती उपचार तक पहुंच गया था। इनके लिए लगभग 1,139.75 करोड़ रुपये की राशि अधिकृत हुई थी।
उस समय तक झारखंड में करीब 92.67 लाख आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके थे और 837 अस्पताल सूचीबद्ध थे।
अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से बढ़ा दायरा
झारखंड में मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ने स्वास्थ्य बीमा का दायरा और बढ़ाया है। इसका उद्देश्य ऐसे गरीब और वंचित परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देना है, जो केंद्र की पात्रता सूची में शामिल नहीं हो पा रहे थे।
राज्य की इस योजना के तहत करीब 35 लाख परिवारों को कवर किए जाने की व्यवस्था है। इसका पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार उठाती है। लाभार्थियों के लिए अलग पहचान प्रणाली और स्वास्थ्य सुरक्षा कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया भी संचालित की जा रही है।
इस योजना के माध्यम से राज्य ने स्वास्थ्य सुरक्षा को केवल केंद्र की पात्रता सूची तक सीमित रखने के बजाय अतिरिक्त परिवारों को भी लाभ देने की कोशिश की है।
पांच लाख से बढ़कर 15 लाख रुपये तक हुआ लाभ
आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत में प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर था। बाद में झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा की सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपये तक कर दी।
इसका लाभ गंभीर बीमारियों के इलाज में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कैंसर, हृदय रोग, किडनी की बीमारी, गंभीर सर्जरी और अन्य जटिल उपचारों में लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं। ऐसे में बढ़ा हुआ स्वास्थ्य कवर गरीब परिवारों के जेब से होने वाले खर्च को कम करने में मदद कर सकता है।
अस्पतालों का नेटवर्क भी हुआ मजबूत
स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी हो सकता है, जब पर्याप्त संख्या में सरकारी और निजी अस्पताल सूचीबद्ध हों। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के जनवरी 2022 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में उस समय 837 अस्पताल सूचीबद्ध थे।
वर्ष 2025-26 के झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, पीएमजेएवाई के तहत राज्य में 550 सूचीबद्ध अस्पतालों के माध्यम से 19.34 लाख मरीजों को लाभ पहुंचाया गया। इस दौरान संचयी संवितरण 2,553 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
सर्वेक्षण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच वार्षिक दावों में 23.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अब चुनौती गुणवत्तापूर्ण इलाज और विशेषज्ञ सुविधाओं की
स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ने के साथ अब चुनौती यह है कि लाभार्थियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। कई बार बीमा कवर उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को विशेषज्ञ इलाज के लिए बड़े शहरों या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
ऐसे में मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, जांच सुविधाओं और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का विस्तार जरूरी है। इससे मरीजों को गंभीर इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह के अनुसार, दोनों योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। गंभीर और जटिल बीमारियों का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी काम किया जा रहा है।
दस वर्षों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार
झारखंड में गरीब परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था ने पिछले दस वर्षों में कई चरणों में विस्तार किया है। 30 हजार रुपये के शुरुआती बीमा कवर से शुरू हुई व्यवस्था 2017 की राज्य स्वास्थ्य बीमा पहल, 2018 की आयुष्मान भारत योजना और इसके बाद मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना तक पहुंची।
अब 15 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य लाभ और लाखों लोगों के उपचार के आंकड़े इस विस्तार को दर्शाते हैं। हालांकि, आगे की राह में इलाज की गुणवत्ता, अस्पतालों की उपलब्धता और राज्य के भीतर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना अहम रहेगा।



