Bach Baras 2026: बछ बारस कब है, पूजा विधि और महत्व, जानें व्रत के नियम

Bach Baras 2026: गोवत्स द्वादशी यानी बछ बारस का व्रत 8 सितंबर को रखा जाएगा। जानें बछ बारस का महत्व, पूजा विधि, क्या खाएं और किन चीजों का सेवन न करें। Bach Baras 2026: बछ बारस कब है, पूजा विधि, महत्व और व्रत के नियम…

Bach Baras 2026: गोवत्स द्वादशी यानी बछ बारस का व्रत 8 सितंबर को रखा जाएगा। जानें बछ बारस का महत्व, पूजा विधि, क्या खाएं और किन चीजों का सेवन न करें।

Bach Baras 2026: बछ बारस कब है, पूजा विधि, महत्व और व्रत के नियम…

Bach Baras 2026: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गोवत्स द्वादशी का व्रत रखा जाता है। इसे बछ बारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गौ माता और उनके बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माताएं यह व्रत अपनी संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए रखती हैं। वहीं, संतान सुख की इच्छा रखने वाली महिलाएं भी यह व्रत कर सकती हैं।

इस वर्ष गोवत्स द्वादशी यानी बछ बारस का व्रत 8 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ कुल देवी-देवताओं की पूजा करने का भी विधान बताया गया है।

बछ बारस का महत्व क्या है?

पंडित राकेश झा के अनुसार, गोवत्स द्वादशी का व्रत विशेष रूप से संतान की कुशलता और दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है। जिन महिलाओं की संतान है, वे बच्चों के मंगल और सुखद भविष्य के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, संतान सुख की कामना रखने वाली महिलाएं भी श्रद्धापूर्वक इस व्रत को कर सकती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गौ माता और उनके बछड़े की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। भगवान कृष्ण और कुल देवी-देवताओं की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।

बछ बारस पर क्या खाएं और क्या नहीं?

गोवत्स द्वादशी के दिन गाय के दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन गौ माता का दूध उनके बछड़े के लिए होता है।

व्रत के दौरान मूंग, मोठ और बाजरे का प्रसाद तैयार कर गौ माता को अर्पित किया जाता है। बाद में इसे बच्चों को भी खिलाया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं भी इसी प्रकार के प्रसाद का सेवन करती हैं।

इस दिन चाकू आदि धारदार वस्तुओं का प्रयोग नहीं करने की भी परंपरा बताई गई है।

गौ वत्स द्वादशी पूजा विधि

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा के लिए पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
  3. घर में घी का दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें और उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
  4. इसके बाद गौ माता और उनके बछड़े की पूजा करें।
  5. गौ माता के सीधे पैर पर जल अर्पित करें।
  6. गौ माता को मूंग और आटे की लोई खिलाएं।
  7. गाय और बछड़े को हरा चारा खिलाएं। गौ माता को मीठी रोटी और गुड़ भी अर्पित किया जा सकता है।
  8. इस दिन अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा भी श्रद्धापूर्वक करें।
  9. पूजा के बाद व्रत के नियमों का पालन करते हुए प्रसाद ग्रहण करें।

बछ बारस पर इन बातों का रखें ध्यान

  • गाय के दूध से बनी किसी भी चीज का सेवन न करने की परंपरा है।
  • गौ माता और बछड़े की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • मूंग, मोठ और बाजरे का प्रसाद अर्पित करें।
  • परिवार और बच्चों की मंगलकामना के साथ व्रत करें।
  • पूजा के दौरान स्वच्छता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखें।

नोट: पूजा-व्रत से जुड़े नियम और मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनकी विधि में कुछ अंतर हो सकता है।

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