भादी अमावस्या 2026 इस वर्ष 11 सितंबर को मनाई जाएगी। जानें श्री राणी सती दादी जी की पूजा, मंगल पाठ, ज्योत पूजन, पितृ-स्मरण और इस पर्व का मारवाड़ी समाज में महत्व।
Bhadi Amavasya 2026: 11 सितंबर को भादी अमावस्या, जानें मारवाड़ी समाज में महत्व और धार्मिक आयोजन
रांची, 8 सितंबर। भादो बदी अमावस्या, जिसे भादी अमावस्या या भादवा बदी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, मारवाड़ी समाज का प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्व है। इस वर्ष भादो बदी अमावस्या 11 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 10 सितंबर से शुरू होकर 11 सितंबर की सुबह तक रहेगी, इसलिए उदयातिथि के अनुसार 11 सितंबर को पर्व मनाया जाएगा।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि भादी अमावस्या मारवाड़ी समाज की आस्था, कुलपरंपरा और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। देश के कई स्थानों पर 10 सितंबर से ही मंगल पाठ, भजन-कीर्तन, ज्योत पूजन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे।
श्री राणी सती दादी जी की होती है विशेष आराधना
मारवाड़ी समाज में श्री राणी सती दादी जी की अत्यंत श्रद्धा के साथ कुलदेवी के रूप में पूजा की जाती है। भादी अमावस्या दादी जी की आराधना के साथ परिवार, कुल और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है।
इस दिन घरों और मंदिरों में दादी जी की ज्योत प्रज्वलित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु पितरों को धोक देकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। अमावस्या को पितृ-स्मरण, तर्पण, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंदिरों में होंगे धार्मिक आयोजन
भादी अमावस्या के अवसर पर दादी जी का विशेष श्रृंगार किया जाता है। विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
- मंगल पाठ
- अखंड ज्योत
- ध्वज पूजन
- भजन-कीर्तन
- चुनरी एवं मेहंदी उत्सव
- जागरण
- महाआरती
- छप्पन भोग
- सवामणी प्रसाद
- निशान शोभायात्रा
शामिल हैं। कई स्थानों पर श्रद्धालु निशान लेकर शोभायात्रा निकालते हैं और दादी जी के चरणों में निशान अर्पित करते हैं।
नारी शक्ति और आत्मबल का संदेश
राणी सती दादी की लोकपरंपरा में नारी के साहस, त्याग, दृढ़ता और आत्मसम्मान को विशेष स्थान दिया जाता है। श्रद्धालु दादी जी की भक्ति से कठिन परिस्थितियों में धैर्य, विश्वास और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा लेते हैं।
वर्तमान समय में इस पर्व की धार्मिक भावना को नारी-सम्मान, आत्मबल और सकारात्मक जीवन-मूल्यों के संदर्भ में समझना भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
सामाजिक एकता का भी पर्व है भादी अमावस्या
भादी अमावस्या केवल व्यक्तिगत पूजा का अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी पर्व है। इस अवसर पर मारवाड़ी समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे सामूहिक रूप से धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं।
भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
क्या है भादी अमावस्या का संदेश?
संजय सर्राफ के अनुसार, भादो बदी अमावस्या का मूल संदेश कुलदेवी के प्रति श्रद्धा, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, परिवार में सुख-शांति, समाज में एकता और जीवन में सेवा-संस्कार है।
यह पर्व अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने तथा नई पीढ़ी को धार्मिक एवं सामाजिक मूल्यों से परिचित कराने की प्रेरणा देता है।
इस प्रकार भादी अमावस्या मारवाड़ी समाज की समृद्ध धार्मिक परंपरा का ऐसा पर्व है, जिसमें भक्ति, परिवार, संस्कार, पितृ-स्मरण, नारी-शक्ति और सामाजिक एकता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। श्रद्धालु इस दिन श्री राणी सती दादी जी से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करते हैं।



