जनगणना-2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी। नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प मिलेगा। जानिए डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया, डेटा गोपनीयता और 2021 में जनगणना टलने की वजह…
नई दिल्ली: भारत में होने वाली जनगणना-2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इस बार जनगणना की प्रक्रिया में तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा। जनगणना से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी और नागरिकों को अपनी जानकारी खुद दर्ज करने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा। इससे जनगणना प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
भारत में जनगणना का इस्तेमाल देश की आबादी, सामाजिक स्थिति, आवास, शिक्षा, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए किया जाता है। सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए ये आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर विभिन्न योजनाओं और नीतियों की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलती है।
पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना
जनगणना-2027 की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल स्वरूप होगा। इससे पहले देश में जनगणना के दौरान बड़े पैमाने पर कागजी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता रहा है। अब डेटा को डिजिटल माध्यम से दर्ज करने की व्यवस्था की जाएगी।
डिजिटल प्रक्रिया से जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और उसके प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे आंकड़ों के संकलन और विश्लेषण की प्रक्रिया भी अधिक तकनीक आधारित हो सकेगी।
हालांकि, जनगणना की पूरी प्रक्रिया में प्रशिक्षित कर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। डिजिटल माध्यम के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि देश के ग्रामीण, दूरदराज और इंटरनेट की सीमित सुविधा वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जानकारी भी सही तरीके से दर्ज हो।
क्या है सेल्फ-एन्यूमरेशन?
जनगणना-2027 में नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प मिलने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि पात्र नागरिक निर्धारित डिजिटल माध्यम के जरिए अपनी जनगणना संबंधी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे।
इस व्यवस्था से लोगों को अपनी जानकारी उपलब्ध कराने का एक अतिरिक्त माध्यम मिलेगा। इससे जनगणना कर्मियों पर भी कुछ हद तक काम का दबाव कम हो सकता है और तकनीक के माध्यम से डेटा जुटाने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, सेल्फ-एन्यूमरेशन की प्रक्रिया में लोगों को अपनी जानकारी सावधानीपूर्वक और सही तरीके से दर्ज करनी होगी। गलत या अधूरी जानकारी से जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
जनगणना के आंकड़े क्यों हैं महत्वपूर्ण?
जनगणना केवल देश की कुल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है। इससे सरकार को समाज और देश की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े मिलते हैं।
जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों के आधार पर सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, सड़क, बिजली, पानी और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की योजना बनाने में मदद मिलती है। अलग-अलग क्षेत्रों में जनसंख्या के आकार और संरचना को समझकर संसाधनों के बेहतर वितरण की योजना बनाई जा सकती है।
जनगणना के आंकड़े शोधकर्ताओं, नीति विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं। देश में सामाजिक और आर्थिक बदलावों को समझने के लिए जनगणना के आंकड़ों का लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है।
व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता पर जोर
डिजिटल जनगणना के साथ लोगों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय है। केंद्र सरकार के अनुसार, जनगणना के दौरान नागरिकों से प्राप्त व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा।
जनगणना की कानूनी प्रक्रिया Census Act, 1948 और Census Rules, 1990 के तहत संचालित होती है। कानून में जनगणना के दौरान जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं।
सरकार के अनुसार, जनगणना से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत जनगणना से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी को RTI के माध्यम से हासिल करने और अदालत में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने पर भी प्रावधान लागू होते हैं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग जनगणना के दौरान अपनी जानकारी बिना किसी डर या आशंका के उपलब्ध करा सकें।
2011 के बाद अब होगी अगली जनगणना
भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में जनगणना प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे निर्धारित समय पर नहीं कराया जा सका।
महामारी के कारण जनगणना की तैयारियों और प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल हुआ। अब जनगणना-2027 के जरिए देश में लंबे अंतराल के बाद नई जनसंख्या संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी।
2011 और 2027 के बीच लंबा अंतर होने के कारण नई जनगणना से देश की वर्तमान जनसंख्या और सामाजिक स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आने की उम्मीद है।
डिजिटल जनगणना से क्या बदलेगा?
डिजिटल जनगणना केवल डेटा दर्ज करने की तकनीक में बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश की जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डिजिटल माध्यम से डेटा दर्ज होने पर जानकारी के संग्रहण और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है। साथ ही सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा से नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ सकती है।
हालांकि, डिजिटल प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए तकनीकी सुविधाओं के साथ डेटा सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में बड़ी चुनौती
भारत जैसे बड़े और विविध देश में डिजिटल जनगणना अपने साथ कई चुनौतियां भी लेकर आएगी। देश के कई ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट और डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता शहरी क्षेत्रों की तुलना में अलग हो सकती है।
ऐसे में जनगणना कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल सुविधा का इस्तेमाल न कर पाने वाले परिवार भी जनगणना प्रक्रिया से पूरी तरह जुड़ सकें।
इसके अलावा लोगों को सेल्फ-एन्यूमरेशन की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना भी जरूरी होगा। इसके लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता होगी।
जनगणना-2027 पर देश की नजर
जनगणना देश की प्रशासनिक और नीतिगत व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है। वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
डिजिटल डेटा संग्रह, सेल्फ-एन्यूमरेशन और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता जैसे पहलू इस जनगणना को पिछली जनगणनाओं से अलग बनाते हैं। वहीं, 2011 के बाद लंबे अंतराल के कारण इससे मिलने वाले आंकड़ों का महत्व और बढ़ जाता है।
आने वाले समय में जनगणना की प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सेल्फ-एन्यूमरेशन की प्रक्रिया और नागरिकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश सामने आने के साथ लोगों के लिए यह प्रक्रिया और स्पष्ट होगी।



