Crude Oil Prices: कच्चे तेल की कीमतों में 4 सत्रों में 9% से ज्यादा गिरावट, महंगाई पर क्या होगा असर?

Crude Oil Prices में बड़ी गिरावट आई है। चार सत्रों में तेल की कीमत 9% से ज्यादा गिरी। जानें अमेरिका-ईरान तनाव, सप्लाई और महंगाई पर विशेषज्ञों की राय। Crude Oil Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट

Crude Oil Prices में बड़ी गिरावट आई है। चार सत्रों में तेल की कीमत 9% से ज्यादा गिरी। जानें अमेरिका-ईरान तनाव, सप्लाई और महंगाई पर विशेषज्ञों की राय।

Crude Oil Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मंगलवार को तेल की कीमतें 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चली गईं, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी भी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक प्रगति तथा सऊदी अरब से तेल आपूर्ति बढ़ने की उम्मीदों ने बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम को कम किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का यह रुख आगे भी जारी रहता है, तो ऊर्जा से जुड़ी महंगाई के दबाव में कमी आ सकती है।

चार सत्रों में कच्चे तेल की कीमत 9% से ज्यादा गिरी

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी विशेषज्ञ मानव मोदी के अनुसार, पिछले चार कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।

उनके मुताबिक, इसके पीछे सऊदी अरब से तेल निर्यात बढ़ने और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति की संभावनाओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। तेल की कीमतों में गिरावट से ऊर्जा आधारित महंगाई के दबाव में भी कमी आने की संभावना है।

अमेरिका-ईरान बातचीत से बाजार की नजरें टिकीं

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत तथा कूटनीतिक संबंधों में सुधार की खबरों से बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम का प्रीमियम कम हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की इच्छा जताए जाने के बाद कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदों पर बाजार की नजर बनी हुई है। हालांकि, मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

शिपिंग और सप्लाई की चिंता में भी कमी

वेंचुरा के कमोडिटी और सीआरएम प्रमुख एनएस रामास्वामी के अनुसार, प्रमुख ट्रांजिट रूट पर अस्थायी रूप से स्थिति में स्थिरता आने और भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम घटने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आया है।

उनके मुताबिक, बाजार का रुख अब पैनिक बाइंग से हटकर ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार और स्थिति पर नजर रखने वाला हो गया है। हालांकि, वैश्विक स्टॉक में कमी के कारण फिजिकल इन्वेंट्री का स्तर अभी भी कम बना हुआ है।

आगे किन बातों पर निर्भर रहेंगी तेल की कीमतें?

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, अमेरिका-ईरान के संबंध, मध्य पूर्व का तनाव और OPEC+ की उत्पादन नीति शामिल हैं।

इसके अलावा समुद्री रास्तों से तेल की आपूर्ति, वैश्विक इन्वेंट्री में बदलाव और सऊदी अरब सहित प्रमुख उत्पादक देशों की सप्लाई भी कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मजबूत डॉलर का भी तेल की कीमतों पर दबाव

अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव डालने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत डॉलर में तय होती है। ऐसे में डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं में तेल अपेक्षाकृत महंगा हो सकता है और मांग पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा क्रैक स्प्रेड, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल-गैसोलीन की मांग भी तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बने हुए हैं।

भविष्य में कहां रह सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें?

विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, निकट भविष्य में ब्रेंट क्रूड 90 से 95 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है। वहीं, भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह कम होने की स्थिति में WTI क्रूड के 75 से 80 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

मध्यम अवधि में यदि वैश्विक तेल आपूर्ति मांग से अधिक रहती है और इन्वेंट्री बढ़ती है, तो इससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, ये बाजार विशेषज्ञों के अनुमान हैं और वास्तविक कीमतें वैश्विक घटनाक्रम, मांग-सप्लाई और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं।

Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी-अभी.