DAV Gandhinagar Ranchi में ‘भाषा का संस्कार, संस्कार की भाषा : हिन्दी’ विषय पर हिन्दी विचार गोष्ठी आयोजित हुई। विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा, संस्कृति और संस्कार से जुड़ने का संदेश दिया गया।
रांची, 21 सितंबर 2026: डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल गांधीनगर, सीसीएल रांची में सोमवार को ‘भाषा का संस्कार, संस्कार की भाषा : हिन्दी’ विषय पर हिन्दी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान, आत्मीयता और गौरव की भावना विकसित करने के साथ दैनिक जीवन में हिन्दी के प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में रांची विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हीरानन्द प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और वैदिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद डी.ए.वी. गान और स्वागत गान प्रस्तुत किया गया।
हिन्दी भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं की भाषा : डॉ. हीरानन्द प्रसाद
मुख्य अतिथि डॉ. हीरानन्द प्रसाद ने कहा कि हिन्दी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-मूल्यों, संस्कृति और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने वाली समृद्ध भाषा है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिन्दी को अपने व्यवहार और अध्ययन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा तभी जीवंत रहती है, जब नई पीढ़ी उसे आत्मीयता के साथ अपनाती है। हिन्दी साहित्य में जीवन के विविध अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं का व्यापक संसार मौजूद है। विद्यार्थियों को हिन्दी साहित्य पढ़ने और उसे समझने का प्रयास करना चाहिए।
हिन्दी हमारी सांस्कृतिक पहचान का माध्यम : एम. के. सिन्हा
झारखंड जोन ‘बी’ के क्षेत्रीय सहायक पदाधिकारी श्री एम. के. सिन्हा ने अपने संदेश में हिन्दी को सांस्कृतिक पहचान और भावनात्मक एकता का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और संस्कारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से हिन्दी के प्रति गौरव का भाव रखते हुए दैनिक जीवन में इसका सहज और प्रभावी प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी का सम्मान करना हमारी समृद्ध भारतीय विरासत का सम्मान करना है।
विद्यार्थियों को भाषा और संस्कार से जोड़ना जरूरी : प्राचार्य
विद्यालय के प्राचार्य श्री प्रदीप कुमार झा ने स्वागत संबोधन में कहा कि विद्यालय का दायित्व केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी भाषा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना भी है।
उन्होंने कहा कि हिन्दी विचारों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ हमारी संवेदनाओं और संस्कारों की भाषा है। विद्यार्थियों को हिन्दी साहित्य का अध्ययन करते हुए भाषा की गरिमा और सौंदर्य को समझना चाहिए।
शिक्षकों ने हिन्दी के महत्व पर रखे विचार
विचार गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने हिन्दी के साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से विचार रखे। विद्यालय के शिक्षकों ने भी हिन्दी भाषा से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में हिन्दी के प्रति आत्मीयता, जागरूकता और गौरव की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।
शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित कई पदाधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक डॉ. तापस घोष, डी.ए.वी. पुंदाग की प्राचार्य डॉ. रेशु चौधरी, डी.ए.वी. आनंद स्वामी के प्राचार्य श्री आनंद सिंह सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन हिन्दी शिक्षक श्री कृष्णानंद तिवारी और श्रीमती रजनी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। वहीं समापन पर वरीय शिक्षिका श्रीमती ए. मणि शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
पूरे आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय पहचान, संस्कृति और संस्कारों की सशक्त अभिव्यक्ति है।



