गणेश चतुर्थी 2026 पर भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, दूर्वा, खीर और पूरन पोली सहित ये 7 प्रिय भोग अर्पित करें। जानें भोग लगाने की विधि और जरूरी नियम।
Ganesh Chaturthi Bhog: गणेश जी को चढ़ाएं ये 7 प्रिय भोग, जानें पूजा के नियम…
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का त्योहार 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त भगवान गणेश का विधि-विधान से स्वागत करते हैं और पूजा के बाद उन्हें तरह-तरह के सात्विक भोग अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गणपति बप्पा को उनके प्रिय भोग चढ़ाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, दूर्वा, गुड़-नारियल और खीर सहित कई चीजों का भोग लगाया जाता है। हालांकि, भोग अर्पित करते समय कुछ पूजा नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं गणेश जी के प्रिय भोग और उनसे जुड़े जरूरी नियम।
गणेश जी को प्रिय हैं ये 7 भोग
1. मोदक का भोग
मोदक भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। चावल के आटे, ताजे नारियल और गुड़ से बने उकडीचे मोदक गणपति पूजा में विशेष महत्व रखते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर बप्पा को 21 मोदक अर्पित करना शुभ माना जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार घर पर मोदक बनाकर भगवान गणेश को भोग लगा सकते हैं।
2. बेसन या मोतीचूर के लड्डू
भगवान गणेश को लड्डू भी बेहद प्रिय माने जाते हैं। गणेश चतुर्थी पर शुद्ध देसी घी से बने बेसन या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाया जा सकता है।
पीला रंग गुरु ग्रह और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में लड्डू का भोग आर्थिक परेशानियां दूर करने और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने से जोड़ा जाता है।
3. केले का जोड़ा
गणपति बप्पा को भोग लगाते समय केले का जोड़ा अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान गणेश को एक केला नहीं, बल्कि दो पके हुए केले साथ में चढ़ाने चाहिए।
इसलिए पूजा की थाली में केले का जोड़ा जरूर रखें।
4. 21 दूर्वा और गुड़-नारियल
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है। गणेश चतुर्थी पर बप्पा को 21 गांठ दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इसके साथ ही भोग की थाली में शुद्ध गुड़ और ताजे नारियल की गिरी भी रख सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि दूर्वा अर्पित करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।
5. केसरिया खीर और पंचामृत
गणेश जी को दूध, चावल, मखाने और केसर से बनी खीर का भोग भी लगाया जाता है। इसे केसरिया खीर कहा जाता है।
इसके अलावा पंचामृत भी पूजा में अर्पित किया जा सकता है। पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है। मान्यता के अनुसार, खीर और पंचामृत का भोग घर में शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
6. पूरन पोली
चना दाल, गुड़ और शुद्ध घी से बनी पूरन पोली भी गणेश जी के प्रिय भोगों में शामिल मानी जाती है। महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में गणेश पूजा के दौरान पूरन पोली विशेष रूप से बनाई जाती है।
धार्मिक मान्यताओं में इसे बुद्धि, ज्ञान और तरक्की से जोड़कर देखा जाता है। भक्त इसे भगवान गणेश को श्रद्धा के साथ अर्पित कर सकते हैं।
7. सूजी का शीरा
सूजी, शुद्ध घी, चीनी और ड्राई फ्रूट्स से बना शीरा या हलवा भी गणपति बप्पा को भोग में चढ़ाया जा सकता है।
यह सात्विक और आसानी से तैयार होने वाला प्रसाद है। मान्यता है कि भगवान गणेश को शीरा अर्पित करने से परिवार में प्रेम, शांति और आपसी सद्भाव बढ़ता है।
गणेश जी को भोग लगाते समय इन नियमों का रखें ध्यान
पूजा करते समय मुख किस दिशा में हो?
गणेश जी को भोग अर्पित करते समय भक्त का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। वास्तु परंपरा में इन दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है।
भोग किस बर्तन में रखें?
भोग चांदी, पीतल, तांबे या केले के पत्ते पर रखकर अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में कांच, प्लास्टिक या लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
तुलसी का पत्ता न चढ़ाएं
गणेश जी की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना वर्जित माना जाता है। इसलिए नैवेद्य या भोग की थाली में तुलसी का पत्ता शामिल न करें।
भोग सात्विक और शुद्ध होना चाहिए
भगवान गणेश को भोग लगाते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखें। प्रसाद बनाते समय प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक सामग्री का इस्तेमाल न करें। भोग तैयार करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है।
भोग अर्पित करने की सरल विधि
- सबसे पहले गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
- भगवान गणेश को फूल, अक्षत और दूर्वा अर्पित करें।
- अपनी श्रद्धा के अनुसार मोदक, लड्डू, फल या अन्य भोग रखें।
- गणेश जी को जल अर्पित करें।
- गणेश मंत्र का जाप करें— ‘ॐ गं गणपतये नमः’।
- अंत में गणेश जी की आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें।
धार्मिक मान्यता: पूजा-पाठ और भोग से जुड़े ये नियम अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं। श्रद्धा, स्वच्छता और सात्विक भावना के साथ भगवान गणेश की पूजा करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।



