पश्चिमी सिंहभूम में 4 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर सालुका कयाम और 1 लाख का इनामी कोदोमुनी कोड़ा शामिल हैं…
पश्चिमी सिंहभूम में 4 नक्सलियों ने पुलिस के सामने डाले हथियार, 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर भी शामिल
पश्चिमी सिंहभूम में 4 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर भी शामिल
पश्चिमी सिंहभूम, 11 अगस्त: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। चाईबासा स्थित कोल्हान पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को चार नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर भी शामिल है।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले चार नक्सलियों में सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर, कोदोमुनी कोड़ा, अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम और पिंकी शामिल हैं। इनमें कोदोमुनी कोड़ा पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस के सामने सौंपे हथियार और अन्य सामग्री
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने अपने पास मौजूद हथियार, कारतूस और नक्सली गतिविधियों से संबंधित अन्य सामग्री सुरक्षा बलों को सौंप दी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सालुका कयाम और कोदोमुनी कोड़ा पर था इनाम
पुलिस के मुताबिक, सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर नक्सली संगठन में जोनल कमांडर के रूप में सक्रिय था और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं कोदोमुनी कोड़ा पर एक लाख रुपये का इनाम था।
पुलिस के अनुसार सालुका कयाम, कोदोमुनी कोड़ा और पिंकी ने पश्चिमी सिंहभूम पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। वहीं अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम ने सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष हथियार डाले।
पिछले चार वर्षों में 75 नक्सलियों ने किया सरेंडर
कोल्हान क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के बीच आत्मसमर्पण का सिलसिला लगातार जारी है। पुलिस के अनुसार, पिछले चार वर्षों में क्षेत्र में अब तक 75 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके अलावा कई नक्सलियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
पुलिस का कहना है कि लगातार अभियानों, बेहतर खुफिया तंत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की बढ़ती पहुंच से क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का प्रभाव कम हुआ है।
करीब तीन दशक से नक्सलवाद की चुनौती
पश्चिमी सिंहभूम और कोल्हान क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है। घने जंगल और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र लंबे समय तक नक्सली संगठनों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में गतिविधियां संचालित करने का आधार रहे हैं।
हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और प्रशासन की बढ़ती पहुंच के बीच नक्सली संगठन का प्रभाव सिमटने का दावा किया जा रहा है। नक्सलियों का आत्मसमर्पण इसी बदलाव का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
डीआईजी ने की हथियार छोड़ने की अपील
आत्मसमर्पण कार्यक्रम में कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा, सीआरपीएफ चाईबासा के डीआईजी, पश्चिमी सिंहभूम एसपी अमित रेणु, सरायकेला-खरसावां एसपी मनोज स्वर्गियारी समेत पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी मौजूद रहे।
डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा ने चार नक्सलियों के आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने सुरक्षा बलों और संबंधित एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की तथा नक्सल हिंसा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने संगठन में अभी भी सक्रिय नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और मुख्यधारा में लौटें।
असीम मंडल के दस्ते पर अभियान जारी
डीआईजी ने बताया कि क्षेत्र में फिलहाल असीम मंडल का दस्ता प्रमुख रूप से सक्रिय बताया जा रहा है। सुरक्षा बल उसकी तलाश में अभियान चला रहे हैं। डीआईजी ने असीम मंडल और उसके दस्ते में शामिल सदस्यों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने और पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की।
Key Highlights
- पश्चिमी सिंहभूम में 4 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
- सालुका कयाम पर 10 लाख रुपये का इनाम था
- कोदोमुनी कोड़ा पर 1 लाख रुपये का इनाम था
- अनिता तामसोय और पिंकी ने भी हथियार छोड़े
- पुलिस के अनुसार, कोल्हान क्षेत्र में 4 वर्षों में 75 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं
- डीआईजी ने सक्रिय नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की
नोट: इनाम, संगठन में भूमिका और पिछले अभियानों से जुड़े विवरण पुलिस द्वारा बताए गए हैं; ऐसे आरोपों/दावों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।



