JPSC Scam: पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते गिरफ्तार, 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच तेज

JPSC Scam: झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया। जानें ₹2 करोड़, 20% कमीशन आरोप और पूरी टाइमलाइन। रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच

JPSC Scam: झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया। जानें ₹2 करोड़, 20% कमीशन आरोप और पूरी टाइमलाइन।

रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बड़ी खबर सामने आई है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में हुई है।

एल. ख्यांग्ते से CID पहले भी कई दौर की पूछताछ कर चुकी थी। जांच के दौरान उनके रांची स्थित आवास और JPSC कार्यालय में तलाशी भी ली गई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ने के साथ पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी हुई है।

14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच

14वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए थे। इसके बाद मामले की जांच CID को सौंपी गई। जांच के दौरान JPSC कार्यालय और परीक्षा से जुड़ी एजेंसी के ठिकानों पर कार्रवाई की गई तथा दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की गई।

जांच का दायरा परीक्षा प्रक्रिया, आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका और आयोग से जुड़े अधिकारियों की कथित भूमिका तक पहुंच चुका है। इस मामले में पहले भी कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

₹2 करोड़ और 20% कमीशन का आरोप क्या है?

जांच से जुड़े मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, TSR Data Processing Private Limited (TDPL) को परीक्षा से संबंधित काम दिए जाने के बदले पूर्व JPSC अध्यक्ष पर करीब ₹2 करोड़ और कुल बिलिंग का 20% कमीशन मांगने/लेने का आरोप सामने आया है। यह आरोप जांच में सामने आए बयानों पर आधारित है और इसकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।

जांच में TDPL की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। रिपोर्टों के मुताबिक एजेंसी पहले भी परीक्षा संबंधी मामलों में कार्रवाई का सामना कर चुकी थी।

JPSC केस के प्रमुख तथ्य

मुद्दाजानकारी
मामला14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा
जांच एजेंसीझारखंड CID
गिरफ्तार व्यक्तिपूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते
परीक्षा एजेंसीTSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL)
सामने आया आरोपकरीब ₹2 करोड़ और 20% कमीशन
जांच की स्थितिजारी
पहले की कार्रवाईJPSC कार्यालय और पूर्व अध्यक्ष के आवास पर तलाशी
छात्र संगठनों की प्रमुख मांगपरीक्षा में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई

कब-कब क्या हुआ? समझिए पूरी टाइमलाइन

जुलाई 2026: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच तेज हुई। CID ने JPSC कार्यालय और पूर्व अध्यक्ष के आवास पर कार्रवाई की।

22 जुलाई: एल. ख्यांग्ते ने JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद CID की पूछताछ और तेज हुई।

जुलाई के अंतिम सप्ताह: CID ने पूर्व अध्यक्ष को पूछताछ के लिए बुलाया और उनसे कई दौर में पूछताछ की।

अगस्त 2026: जांच के बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की गिरफ्तारी की खबर सामने आई।

छात्र आंदोलन के बीच गिरफ्तारी क्यों अहम?

JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। छात्र संगठन कई मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ छात्र संगठनों ने CID जांच के बजाय CBI जांच की मांग भी उठाई है।

ऐसे समय में JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी से मामले की जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, गिरफ्तारी का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

JPSC परीक्षा विवाद: अब आगे क्या?

अब जांच एजेंसी कथित अनियमितताओं में शामिल अन्य लोगों की भूमिका, परीक्षा प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों और आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े आरोपों की जांच आगे बढ़ा सकती है। जांच के निष्कर्षों और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में किसकी क्या भूमिका थी।


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