नवरात्रि का तीसरा दिन कल, मां चंद्रघंटा की पूजा से जुड़ी विधि, भोग और शुभ रंग जानें

13 अक्टूबर को होगी मां चंद्रघंटा की आराधना, पूजा में दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की मान्यता रांची। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष 13 अक्टूबर को नवरात्रि

13 अक्टूबर को होगी मां चंद्रघंटा की आराधना, पूजा में दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की मान्यता

रांची। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष 13 अक्टूबर को नवरात्रि का तीसरा दिन मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भक्त मां की पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी कारण उन्हें मां चंद्रघंटा कहा जाता है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों को भय और संकटों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप

मां चंद्रघंटा का स्वरूप शांत होने के साथ-साथ शक्ति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उनके दस हाथ बताए गए हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। उनका वाहन सिंह है। मां का यह स्वरूप साहस, निर्भयता और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर मां दुर्गा और मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें।

पूजा के दौरान मां को फूल, अक्षत, रोली और धूप-दीप अर्पित करें। इसके बाद मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में मां की आरती कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त खीर या अन्य सात्विक पकवान भी श्रद्धापूर्वक चढ़ा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

तीसरे दिन का शुभ रंग

नवरात्रि के तीसरे दिन के लिए ग्रे रंग को शुभ माना जाता है। हालांकि, नवरात्रि के नौ रंगों की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार बदल सकती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वच्छ और शालीन वस्त्र पहनकर मां की पूजा कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। मां का स्वरूप भक्तों को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना कर भक्त जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता की कामना करते हैं।

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