पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी से जुड़ा है मामला, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता से चार सप्ताह में मांगा जवाब
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र की निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है। साथ ही, अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले की समीक्षा करने पर सहमति जताई है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ वर्ष 2019 में जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।
मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल को नोटिस जारी किया। दोनों पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 सितंबर 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी समन रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की थी।
यह समन मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जारी किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह तक टालने का अपना 2021 का आदेश जारी रखने को कहा था, ताकि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।
क्या है राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला?
शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक सार्वजनिक सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शिकायत के अनुसार, इन बयानों से प्रधानमंत्री के साथ-साथ भाजपा के सदस्यों और उनसे जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
शिकायतकर्ता ने अदालत में कहा था कि वह भाजपा के सदस्य हैं और अपने नेता के खिलाफ की गई टिप्पणी से आहत हुए हैं। इसी आधार पर उन्होंने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
राहुल गांधी ने क्या टिप्पणी की थी?
सितंबर 2018 में राजस्थान की एक रैली के दौरान राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। इस दौरान उन्होंने ‘हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है’ जैसे राजनीतिक नारे का इस्तेमाल किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-थीफ’ यानी चोरों का सरदार जैसे शब्दों का भी प्रयोग किया था।
इन टिप्पणियों को लेकर शिकायतकर्ता ने मानहानि का आरोप लगाया था। हालांकि, मामले में आरोपों और उनके कानूनी प्रभाव पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है।
राहुल गांधी के वकील ने क्या दलील दी?
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में लागू कानूनी सिद्धांत पहले से स्पष्ट हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता से जवाब मांगा है। निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक का अर्थ यह नहीं है कि राहुल गांधी के खिलाफ मामला पूरी तरह समाप्त हो गया है। अब आगे की सुनवाई में शीर्ष अदालत याचिका और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।



