मॉस्को, 2 अक्टूबर। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने NATO देशों को कलिनिनग्राद को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। मॉस्को में वल्दाई फोरम के दौरान पुतिन ने कहा कि अगर रूस के क्षेत्र पर सीधा हमला होता है तो रूस अपनी रक्षा के लिए अपने पास मौजूद सभी हथियारों का इस्तेमाल करने पर विचार करेगा, जिसमें परमाणु हथियार भी शामिल हैं।
पुतिन ने कहा कि रूस किसी यूरोपीय देश पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि रूसी क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की स्थिति में मॉस्को जवाब देगा। उनके बयान में खास तौर पर कलिनिनग्राद का उल्लेख किया गया, जो रूस का मुख्य भू-भाग से अलग बाल्टिक क्षेत्र है और पोलैंड तथा लिथुआनिया के बीच स्थित है।
कलिनिनग्राद को लेकर रूस और NATO में बढ़ा तनाव
पुतिन का बयान उस रूसी राजनयिक संदेश के बाद आया है, जिसमें मॉस्को ने NATO पर कलिनिनग्राद को अलग-थलग करने की संभावित कोशिश का आरोप लगाया था। रूस ने कहा था कि यदि NATO इस क्षेत्र को रूस के बाकी हिस्से से काटने की कोशिश करता है तो वह अपने पूरे सैन्य शस्त्रागार का इस्तेमाल कर सकता है।
कलिनिनग्राद रूस का एक एक्सक्लेव है, यानी रूस का ऐसा क्षेत्र जो मुख्य रूसी भू-भाग से जुड़ा नहीं है। यह बाल्टिक सागर के किनारे पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण यह रूस और NATO के बीच सुरक्षा तनाव का महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है।
NATO ने परमाणु धमकी पर जताई आपत्ति
NATO महासचिव मार्क रुटे ने रूस की परमाणु चेतावनी को लेकर प्रतिक्रिया दी। NATO के अनुसार गठबंधन रक्षात्मक है और वह कलिनिनग्राद को निशाना नहीं बना रहा। रुटे ने रूस से परमाणु धमकियां बंद करने की अपील की। NATO की ओर से यह भी कहा गया कि ऐसे बयान तनाव कम करने में मदद नहीं करते।
रूस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कलिनिनग्राद?
कलिनिनग्राद रूस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र है। यहां रूस की बाल्टिक फ्लीट की मौजूदगी है और इस क्षेत्र में इस्कंदर मिसाइल प्रणालियां भी तैनात हैं, जिनमें कुछ मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं।
बाल्टिक सागर में NATO की सैन्य गतिविधियों और अभ्यासों के बीच कलिनिनग्राद को लेकर रूस की चिंता बढ़ी है। वहीं NATO अपनी गतिविधियों को क्षेत्रीय सुरक्षा और सदस्य देशों की रक्षा से जुड़ा कदम बताता है। इस स्थिति ने रूस और NATO के बीच तनाव को और बढ़ाया है।
पुतिन ने वल्दाई फोरम में यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं और सभी पक्षों को ऐसे कदमों से बचना चाहिए, जिनसे स्थिति और गंभीर हो सकती है।



