खेल और संवाद से युवाओं ने समझा संविधान का महत्व, पांच राज्यों के 90 युवाओं ने साझा किए अनुभव

रांची। युवाओं में संवैधानिक मूल्यों की समझ विकसित करने और उन्हें सामाजिक बदलाव की पहल से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को रांची में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रतिज्ञा, कम्युनिटी- द यूथ कलेक्टिव और शैडो की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड,

रांची। युवाओं में संवैधानिक मूल्यों की समझ विकसित करने और उन्हें सामाजिक बदलाव की पहल से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को रांची में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रतिज्ञा, कम्युनिटी- द यूथ कलेक्टिव और शैडो की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 90 युवाओं ने पिछले आठ महीनों की जागरूकता यात्रा के अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान 10 संस्थाओं ने मेले के माध्यम से पिछले आठ माह में किए गए अपने कार्यों, गतिविधियों और उनसे मिली सीख को प्रस्तुत किया। आयोजन में खेल, संवाद और सामूहिक गतिविधियों के जरिए युवाओं को संविधान के मूल्यों से जोड़ने के प्रयासों को सामने रखा गया।

खेल के माध्यम से संविधान के मूल्यों को समझने की पहल

कार्यक्रम में युवाओं ने बताया कि खेल और विभिन्न संवादात्मक गतिविधियों के जरिए उन्होंने समानता, सम्मान, सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों को समझने का प्रयास किया। इन गतिविधियों को बाद में किशोर-किशोरी समूहों तक भी पहुंचाया गया, ताकि अधिक से अधिक युवा सामाजिक पहल से जुड़ सकें।

आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य युवाओं में केवल संवैधानिक अधिकारों की जानकारी बढ़ाना नहीं, बल्कि संविधान में निहित मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाने की भावना विकसित करना भी है।

‘फिफ्थ स्पेस’ की अवधारणा पर हुआ संवाद

कार्यक्रम के दौरान ‘फिफ्थ स्पेस’ की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। संवाद के जरिए ऐसे साझा और सुरक्षित स्थान की कल्पना को सामने रखा गया, जहां हर व्यक्ति को सम्मान मिले और वह बिना किसी पूर्वाग्रह के अपनी बात रख सके।

इस दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां प्रत्येक व्यक्ति खुद को सुरक्षित, शामिल और स्वीकार्य महसूस करे। युवाओं ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि संवाद और सहभागिता सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

आठ माह की यात्रा में मिली सीख साझा की

परिचर्चा के दौरान युवा कार्यकर्ताओं ने पिछले आठ महीनों की यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि विभिन्न गतिविधियों और संवादों ने उन्हें अपने स्तर पर सामाजिक बदलाव की पहल करने के लिए प्रेरित किया।

युवाओं ने यह भी बताया कि इस दौरान उन्होंने दूसरे युवाओं को भी सामाजिक बदलाव की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया। उनके अनुभवों में समुदाय के साथ संवाद, समूहों के साथ काम करने और संवैधानिक मूल्यों को व्यवहार में उतारने से जुड़ी सीख प्रमुख रही।

संवैधानिक मूल्यों को व्यवहार में उतारने पर जोर

कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि सामाजिक बदलाव केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए संवैधानिक मूल्यों को अपने व्यवहार में अपनाने और उन्हें समाज के दूसरे लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।

आयोजकों और युवाओं ने इस बात पर जोर दिया कि समानता, सम्मान और सहभागिता जैसे मूल्यों को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाकर ही सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है।

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