JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्त कर्मियों को हटाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती, दूसरी नौकरी छोड़कर किया था योगदान

JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्त कर्मियों को हटाने के सरकारी आदेश को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने कहा कि दूसरी नौकरी छोड़कर योगदान किया और प्रशिक्षण पूरा किया था। रांची, 19 अगस्त 2026। झारखंड सरकार की

JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्त कर्मियों को हटाने के सरकारी आदेश को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने कहा कि दूसरी नौकरी छोड़कर योगदान किया और प्रशिक्षण पूरा किया था।

रांची, 19 अगस्त 2026। झारखंड सरकार की ओर से 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर नियुक्त कर्मियों को हटाने के आदेश को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने विज्ञापन संख्या 1/2024 के तहत आयोजित परीक्षा को रद्द किए जाने और इसके आधार पर हुई नियुक्ति समाप्त करने के सरकारी फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि सोनम कुमारी ने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर झारखंड में नियुक्ति के बाद योगदान दिया था। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने निर्धारित प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर परीक्षा रद्द करने के साथ नियुक्ति समाप्त कर दी।

दूसरी नौकरी छोड़कर झारखंड में किया था योगदान

याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर JPSC सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से झारखंड में नियुक्ति स्वीकार की थी। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उन्होंने विभाग में योगदान दिया और प्रशिक्षण भी पूरा किया।

याचिका में तर्क दिया गया है कि प्रशिक्षण पूरा करने और नियुक्ति के बाद अब सेवा समाप्त किए जाने से उनके सामने गंभीर कठिनाई पैदा हो गई है। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से नियुक्ति रद्द करने संबंधी सरकार के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया है।

342 सफल अभ्यर्थी कर रहे थे नौकरी

बताया गया है कि 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफल 342 अभ्यर्थी वर्तमान में विभिन्न पदों पर कार्यरत थे। सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने के बाद इन नियुक्त कर्मियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

CID जांच के बाद सरकार ने लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला

उल्लेखनीय है कि CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इसके अलावा वर्ष 2014 से आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को देखते हुए जांच कराने का निर्णय भी लिया गया है।

इसी के तहत कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षाएं रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और विभिन्न परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है।

अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाएं रद्द, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल किया गया है।

हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्त कर्मियों को हटाने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल होने से मामला अब न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है। याचिकाकर्ता ने नियुक्ति रद्द करने संबंधी सरकारी आदेश को निरस्त करने की मांग की है। अब इस मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई और आगे की कार्रवाई पर अभ्यर्थियों एवं नियुक्त कर्मियों की नजर रहेगी।

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