Sudivya Sonu Biography: झामुमो नेता और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर 1989 में एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। जानें उनके संघर्ष से मंत्री बनने तक की पूरी कहानी।
Sudivya Sonu Biography: जमीन से सत्ता के शिखर तक पहुंचे सुदिव्य सोनू, जानें पूरा राजनीतिक सफर
रांची/गिरिडीह, 6 सितंबर। झारखंड सरकार के मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार तड़के गिरिडीह के मर्सी अस्पताल में निधन हो गया। देर रात अचानक सीने में तेज दर्द के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह से लेकर रांची तक राजनीतिक गलियारों और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर दौड़ गई।
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर किसी बड़े राजनीतिक परिवार से नहीं, बल्कि एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। वर्षों तक पार्टी संगठन के लिए काम करने, गांव-गांव तक पहुंच बनाने और आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के बाद उन्होंने गिरिडीह की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतने के बाद वह हेमंत सोरेन सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालने तक पहुंचे।
सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया
मर्सी अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, हरसिंहरायडीह निवासी सुदिव्य कुमार सोनू को 5 सितंबर की मध्यरात्रि घर पर अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रात करीब 2:15 बजे अस्पताल लाया गया।
अस्पताल पहुंचने के समय उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी। उन्हें सीने में दर्द के साथ उल्टी के एस्पिरेशन की समस्या थी। उनका ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था, जबकि पल्स और ऑक्सीजन सैचुरेशन लगातार गिर रहा था।
आईसीयू विशेषज्ञों और चिकित्सकों की टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया। इलाज के दौरान उनकी स्थिति और बिगड़ गई और उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया। चिकित्सकों ने सीपीआर, कार्डिएक कम्प्रेशन और अन्य जरूरी उपचार किए। उनके व्यक्तिगत कार्डियोलॉजिस्ट से वीडियो कॉल के जरिए चिकित्सकीय सलाह भी ली गई। तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और सुबह 4:05 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
1989 में झामुमो से शुरू किया राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू ने 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। उस समय वह पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता के रूप में जुड़े थे। झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौर में उन्होंने झामुमो के कार्यक्रमों और आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई।
संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए उन्होंने लगातार काम किया। कभी दीवार लेखन किया तो कभी कंधे पर झामुमो का झंडा लेकर गांवों और कस्बों में पहुंचे। लंबे समय तक संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम करने के कारण पार्टी में उनकी पकड़ मजबूत होती गई।
गिरिडीह नगर कमिटी के संस्थापक अध्यक्ष बने
संगठन में सक्रियता को देखते हुए वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वह गिरिडीह नगर कमिटी के संस्थापक अध्यक्ष बने।
इसके बाद वर्ष 2003 में झामुमो के जिलाध्यक्ष बनाए गए। वर्ष 2003 से 2010 तक उन्होंने जिलाध्यक्ष के रूप में संगठन की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने गांव से लेकर शहर तक पार्टी संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
1991 में गोड्डा में किया था चुनाव प्रचार
सुदिव्य सोनू के राजनीतिक सफर में वर्ष 1991 का लोकसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण रहा। पार्टी की ओर से उन्हें गोड्डा संसदीय क्षेत्र में झामुमो प्रत्याशी सूरज मंडल के पक्ष में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसी दौरान 21 मई 1991 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की खबर सामने आई, जिसके बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया। सोनू गोड्डा में पार्टी के काम में जुटे रहे और मतदान से पहले वापस लौटे।
2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा
लंबे समय तक संगठन में काम करने के बाद वर्ष 2009 में झामुमो ने उन्हें गिरिडीह विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि वह चुनाव जीत नहीं सके। वर्ष 2014 में पार्टी ने उन्हें फिर मौका दिया और इस बार वह दूसरे स्थान पर रहे।
इसके बाद वर्ष 2019 में तीसरी बार उन्हें गिरिडीह से उम्मीदवार बनाया गया। इस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने लगातार दूसरी बार गिरिडीह सीट से जीत हासिल की।
लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतने के बाद झामुमो में उनका राजनीतिक कद और मजबूत हुआ।
हेमंत सोरेन सरकार में संभाली कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को हेमंत सोरेन सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे।
सरकार के साथ-साथ संगठन में भी उनकी सक्रिय भूमिका बनी रही। उन्हें झामुमो के रणनीतिकारों में गिना जाता था और पार्टी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में उनकी भागीदारी रहती थी।
छात्र आंदोलन में भी सरकार और छात्रों के बीच बने संवाद का माध्यम
हाल के दिनों में जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान भी सुदिव्य सोनू सक्रिय रहे। उन्होंने सरकार और छात्र संगठनों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की।
सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों की समिति में भी वह शामिल थे। छात्र संगठनों और सरकार के बीच बातचीत में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया।
शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में थे
सुदिव्य कुमार सोनू को झामुमो के संस्थापक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के करीबी नेताओं में माना जाता था। लंबे समय तक संगठन में काम करने के कारण उन्हें पार्टी की जमीनी राजनीति और कार्यकर्ताओं की अच्छी समझ थी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी उनका राजनीतिक और संगठनात्मक जुड़ाव मजबूत रहा। सुदिव्य सोनू के निधन पर मुख्यमंत्री ने उन्हें ‘सोनू भैया’ कहकर याद किया और उनके निधन को व्यक्तिगत क्षति बताया।
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौर से ही सुदिव्य कुमार सोनू दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने अपना जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया।
शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का असामयिक निधन
सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। खास बात यह है कि वर्ष 2023 से अब तक शिक्षा से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले झामुमो के तीन मंत्रियों का असामयिक निधन हो चुका है।
जगरनाथ महतो का 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान निधन हुआ था। वह हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे।
इसके बाद रामदास सोरेन को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी मिली। उनका 15 अगस्त 2025 को आकस्मिक निधन हो गया। वह घाटशिला से विधायक और झामुमो के वरिष्ठ नेता थे।
अब 6 सितंबर 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से यह सिलसिला और दुखद हो गया है। तीनों नेताओं का निधन झारखंड की राजनीति और शिक्षा क्षेत्र के लिए बेहद असामान्य और पीड़ादायक घटनाक्रम है।
जमीन से सत्ता के शिखर तक का सफर हुआ खत्म
दीवार लेखन और पार्टी का झंडा लेकर गांव-गांव घूमने वाले एक सामान्य कार्यकर्ता से लेकर विधायक और राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री तक का सुदिव्य कुमार सोनू का सफर झामुमो की जमीनी राजनीति की कहानी भी है।
उनके अचानक निधन से गिरिडीह के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के साथ-साथ झामुमो संगठन में भी एक बड़ी कमी पैदा हुई है। उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता उन्हें एक जमीनी नेता, संगठन के समर्पित कार्यकर्ता और झारखंड के प्रति प्रतिबद्ध राजनेता के रूप में याद कर रहे हैं।



