TMC और उद्धव गुट के बागी सांसद NDA में शामिल, संसद में मोदी सरकार का बढ़ा संख्याबल

Meta Title:TMC और उद्धव गुट के बागी सांसद NDA में शामिल, संसद में मोदी सरकार का बढ़ा संख्याबल Meta Description:TMC के 20 और उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों के NDA में शामिल होने से मोदी सरकार का संसद में संख्याबल बढ़ा है। जानिए NCPI

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TMC और उद्धव गुट के बागी सांसद NDA में शामिल, संसद में मोदी सरकार का बढ़ा संख्याबल

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TMC के 20 और उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों के NDA में शामिल होने से मोदी सरकार का संसद में संख्याबल बढ़ा है। जानिए NCPI विलय, महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर इसका क्या असर पड़ेगा।


TMC और उद्धव गुट के बागी सांसद NDA में शामिल, संसद में मोदी सरकार का बढ़ा संख्याबल

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच केंद्र की मोदी सरकार को बड़ा राजनीतिक संबल मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव गुट) के बागी सांसदों के NDA में शामिल होने से सरकार का संख्याबल पहले से मजबूत हुआ है। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए सरकार को अभी भी कुछ और समर्थन की जरूरत होगी।

TMC के 20 सांसदों ने छोड़ा पार्टी का साथ

सूत्रों के अनुसार, TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है। सांसदों ने अपने हस्ताक्षर वाला पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया था।

NCPI पश्चिम बंगाल में पंजीकृत राजनीतिक दल है, जिसने वर्ष 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से अपनी राजनीतिक शुरुआत की थी। हालांकि, उस चुनाव में पार्टी के सभी उम्मीदवार हार गए थे।

पीएम मोदी से मुलाकात की चर्चा

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, TMC के बागी गुट के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

NDA को मिला बड़ा राजनीतिक फायदा

TMC और उद्धव गुट के बागी सांसदों के समर्थन से NDA की ताकत संसद में बढ़ी है। इससे सरकार को भविष्य में महत्वपूर्ण विधेयकों, खासकर महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने में राजनीतिक बढ़त मिल सकती है।

हालांकि, सरकार अभी भी दोनों सदनों में संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से कुछ दूरी पर है।

अप्रैल के विशेष सत्र में नहीं मिल सकी थी सफलता

गौरतलब है कि अप्रैल में आयोजित संसद के विशेष सत्र के दौरान सरकार संविधान संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफल नहीं हो पाई थी। इसके बाद से विपक्ष के कई सांसद सत्ता पक्ष के समर्थन में आए हैं, जिससे NDA का संख्याबल पहले की तुलना में मजबूत हुआ है।

राजनीतिक समीकरणों पर सबकी नजर

संसद के मौजूदा मानसून सत्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों आगामी रणनीति बनाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर सभी की नजर रहेगी।


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