ISRO Privatization विवाद के बीच चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि ISRO सरकारी संस्था है और इसका निजीकरण नहीं हुआ है। जानें कर्मचारी संगठनों की चिंता और हर साल 50 लॉन्च व्हीकल के लक्ष्य की पूरी कहानी।
ISRO Privatization: निजीकरण की खबरों पर ISRO चीफ वी. नारायणन का बड़ा बयान, बोले- सरकारी संस्था है ISRO
नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ISRO एक सरकारी संस्था है और इसका निजीकरण नहीं हुआ है। उन्होंने कर्मचारियों की ओर से उठाई गई चिंताओं को जायज बताते हुए कहा कि उनका समाधान किया जाएगा।
नारायणन ने यह बात बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (BSX) के 9वें संस्करण के उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भारत के स्पेस सेक्टर और स्पेस इकोनॉमी को आगे बढ़ाने के लिए ISRO निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम कर रहा है।
ISRO निजीकरण विवाद के बीच क्या बोले चेयरमैन?
वी. नारायणन ने कहा कि देश में स्पेस इकोसिस्टम और स्पेस इकोनॉमी को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। ISRO सरकारी निवेश के साथ काम कर रहा है, लेकिन अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने करीब छह साल पहले लागू किए गए स्पेस सेक्टर रिफॉर्म का जिक्र करते हुए कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को सहयोग देना तथा देश के स्पेस इकोसिस्टम का विस्तार करना है।
हर साल 50 लॉन्च व्हीकल की जरूरत
ISRO चीफ ने भारत की बढ़ती अंतरिक्ष जरूरतों को देखते हुए कहा कि देश को हर साल करीब 50 लॉन्च व्हीकल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को आगे बढ़ना होगा।
नारायणन ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह करीब 43 साल पहले ISRO में आए थे, तब लगभग तीन साल में एक लॉन्च होता था। आज देश की अंतरिक्ष गतिविधियां और जरूरतें काफी बढ़ चुकी हैं।
ISRO चीफ की 3 बड़ी बातें
| मुद्दा | वी. नारायणन का बयान |
|---|---|
| ISRO का निजीकरण | ISRO सरकारी संस्था है, इसका निजीकरण नहीं हुआ |
| स्पेस इकोनॉमी | निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम जारी |
| लॉन्च व्हीकल | भारत को हर साल करीब 50 लॉन्च व्हीकल की जरूरत |
9 कर्मचारी संगठनों ने उठाए थे सवाल
ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने 4 सितंबर को चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र भेजकर अंतरिक्ष एजेंसी के कामकाज में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।
कर्मचारी संगठनों की चिंता थी कि ISRO की मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल गतिविधियों को निजी संस्थाओं को सौंपने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। संगठनों ने कहा कि सरकारी संस्थानों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO को एक मजबूत संगठन के रूप में बनाए रखना जरूरी है। इसे केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) संस्था तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
कैसे शुरू हुआ ISRO के निजीकरण का विवाद?
विवाद की शुरुआत 21 अगस्त को IN-SPACe चेयरपर्सन पवन गोयनका के एक कार्यक्रम में दिए बयान के बाद हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि भविष्य में ISRO लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा और यह जिम्मेदारी निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSU) संभालेंगी।
IN-SPACe देश में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, उन्हें मंजूरी देने और उनकी निगरानी से जुड़ी भूमिका निभाता है।
इसके बाद ISRO कर्मचारी संगठनों ने एजेंसी की भूमिका और भविष्य को लेकर सवाल उठाए।
कर्मचारियों की क्या चिंता है?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ISRO की तकनीक, टेस्टिंग सुविधाएं और लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर लंबे समय से सार्वजनिक धन से विकसित किए गए हैं। इसलिए इन संसाधनों को निजी कंपनियों के साथ साझा करने या हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।
उनकी मुख्य चिंता यह है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाते हुए ISRO की मूल तकनीकी और ऑपरेशनल क्षमता कमजोर नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
ISRO की भूमिका को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के नाम पर केंद्र सरकार ISRO की भूमिका कम कर रही है।
हालांकि, यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप है। वहीं ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष एजेंसी सरकारी संस्था है और इसका निजीकरण नहीं हुआ है।
57 साल पहले हुई थी ISRO की स्थापना
ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसका पूरा नाम Indian Space Research Organisation (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) है और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है।
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखने में डॉ. विक्रम साराभाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। इससे पहले वर्ष 1962 में INCOSPAR का गठन किया गया था, जिसकी अगुवाई भी विक्रम साराभाई ने की थी।
आज ISRO भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष अनुसंधान में प्रमुख भूमिका निभाता है। अब अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।



