वॉशिंगटन, 23 अक्टूबर 2026। अमेरिका के मिसिसिपी स्थित एक परमाणु रिएक्टर के अचानक ऑटोमैटिक शटडाउन होने के बाद इसकी जांच शुरू कर दी गई है। वाटरफोर्ड-3 नाम का यह रिएक्टर 1,152 मेगावाट क्षमता का है। इसे 17 अक्टूबर को तय शेड्यूल के अनुसार ईंधन भरने (रीफ्यूलिंग) के लिए बंद किया जाना था, लेकिन उससे कुछ घंटे पहले ही 16 अक्टूबर की रात करीब 10:45 बजे टर्बाइन ट्रिप होने के कारण रिएक्टर अपने आप बंद हो गया।
घटना के दौरान एक इलेक्ट्रिकल बस का फास्ट ट्रांसफर सिस्टम काम नहीं कर पाया। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के तहत एक इमरजेंसी डीजल जनरेटर अपने आप चालू हो गया और संबंधित सेफ्टी बस को बिजली उपलब्ध कराई।
रीफ्यूलिंग से पहले हुआ ऑटोमैटिक शटडाउन
एंटरजी द्वारा संचालित वाटरफोर्ड-3 में ईंधन भरने की प्रक्रिया 17 अक्टूबर की सुबह के लिए निर्धारित थी। इसके लिए रिएक्टर को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी चल रही थी और यूनिट करीब 75 प्रतिशत पावर पर थी।
इसी दौरान टर्बाइन के इलेक्ट्रोहाइड्रोलिक सिस्टम की नियमित टेस्टिंग के दौरान टर्बाइन ट्रिप हो गई। टर्बाइन ट्रिप होने के बाद रिएक्टर की सुरक्षा प्रणाली ने ऑटोमैटिक शटडाउन किया और सभी कंट्रोल रॉड रिएक्टर कोर में चली गईं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह प्रक्रिया रिएक्टर की डिजाइन की गई सुरक्षा व्यवस्था के अनुरूप थी।
इलेक्ट्रिकल सिस्टम में आई दिक्कत
एंटरजी ने अमेरिकी न्यूक्लियर रेगुलेटरी कमीशन (NRC) को बताया कि ‘2B’ बस का फास्ट डेड बस ट्रांसफर सफल नहीं हो पाया। इसके बाद इमरजेंसी डीजल जनरेटर ‘B’ अपने आप शुरू हुआ और उसने ‘3B’ सेफ्टी बस को बिजली उपलब्ध कराई।
प्लांट को इस दौरान ‘इमरजेंसी फीडवॉटर एक्चुएशन’ का सिग्नल भी मिला। यह सिस्टम रिएक्टर के ट्रिप होने के बाद स्टीम जनरेटर तक आवश्यक पानी पहुंचाने के लिए बैकअप व्यवस्था को सक्रिय करता है।
क्या होता है फास्ट डेड बस ट्रांसफर?
परमाणु संयंत्र में रिएक्टर के संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण उपकरणों को लगातार बिजली की जरूरत होती है। सामान्य स्थिति में प्लांट के आंतरिक उपकरणों को बिजली उसके अपने जनरेटर से मिलती है।
अगर टर्बाइन या जनरेटर ट्रिप हो जाए, तो इन उपकरणों को तत्काल बाहरी ग्रिड से बिजली देने की व्यवस्था होती है। इसी बदलाव को फास्ट डेड बस ट्रांसफर कहा जाता है। वाटरफोर्ड-3 की घटना में एक इलेक्ट्रिकल बस के लिए यह ट्रांसफर सफल नहीं हुआ।
ऐसी स्थिति के लिए प्लांट में इमरजेंसी डीजल जनरेटर लगाए जाते हैं। इस घटना में संबंधित डीजल जनरेटर स्वत: चालू हुआ और सेफ्टी बस को बिजली उपलब्ध कराई।
रिएक्टर ‘मोड 3’ में स्थिर
एंटरजी के अनुसार, घटना के बाद यूनिट मोड-3 यानी हॉट स्टैंडबाय स्थिति में स्थिर है। रिएक्टर बंद होने के बाद भी उसके ईंधन से गर्मी निकलती रहती है। इसे डिके हीट कहा जाता है।
चेन रिएक्शन रुकने के बाद भी ईंधन में मौजूद फिशन प्रोडक्ट्स के क्षय से कुछ समय तक गर्मी पैदा होती रहती है। इसलिए रिएक्टर बंद होने के बाद भी कूलिंग सिस्टम को लगातार काम करना पड़ता है।
NRC को दी गई घटना की जानकारी
घटना के कुछ घंटे बाद एंटरजी ने NRC को इसकी सूचना दी। NRC की इवेंट नोटिफिकेशन रिपोर्ट में इसे दर्ज किया गया है। 21 अक्टूबर की पावर रिएक्टर स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार वाटरफोर्ड-3 की उपलब्ध पावर शून्य प्रतिशत थी और यूनिट आउटेज में थी।
टर्बाइन ट्रिप होने के वास्तविक कारण की जांच अभी जारी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी बड़े रेडिएशन रिसाव या परमाणु आपातकाल की पुष्टि नहीं की गई है।
पिछले दो महीनों में तीसरी ऐसी घटना
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में पिछले करीब दो महीनों के दौरान रिएक्टर के अप्रत्याशित रूप से बंद होने की यह तीसरी उल्लेखनीय घटना है।
अगस्त में फ्लोरिडा के सेंट लूसी यूनिट-1 में कंट्रोल रॉड से जुड़ी घटना के बाद रिएक्टर को मैन्युअल रूप से बंद किया गया था। वहीं सितंबर में इलिनोइस के ड्रेसडेन-2 में सुरक्षा प्रणाली से जुड़ी समस्या के बाद कर्मचारियों ने रिएक्टर को मैन्युअल रूप से ट्रिप किया था।
वाटरफोर्ड-3 की मौजूदा घटना में रिएक्टर का शटडाउन ऑटोमैटिक सुरक्षा प्रणाली के जरिए हुआ, जबकि इलेक्ट्रिकल पावर ट्रांसफर की समस्या के बाद इमरजेंसी डीजल जनरेटर ने बैकअप बिजली उपलब्ध कराई।



