रांची: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज SC-ST एक्ट की प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर हेमंत सोरेन की ओर से 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा गया था। अदालत ने छह सप्ताह की मांग स्वीकार नहीं की और चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अतिरिक्त समय मांगने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
ED अधिकारियों ने FIR रद्द करने की मांग की है
यह मामला ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य के खिलाफ रांची के SC-ST थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। अधिकारियों की ओर से इस प्राथमिकी और इससे जुड़ी कार्रवाई को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, हेमंत सोरेन की ओर से 31 जनवरी 2024 को दर्ज कराई गई प्राथमिकी में ईडी अधिकारियों पर पूछताछ और जांच के दौरान उत्पीड़न तथा उनकी सामाजिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। ये आरोप सोरेन की ओर से लगाए गए हैं और मामले में अदालत के समक्ष कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पहले भी लग चुका है जुर्माना
इस मामले में जवाब दाखिल करने में देरी को लेकर अप्रैल 2026 में हुई सुनवाई के दौरान भी अदालत ने जुर्माना लगाया था। ताजा सुनवाई में दोबारा अतिरिक्त समय मांगे जाने पर कोर्ट ने फिर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अब मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी। उस दौरान प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली याचिका पर आगे की सुनवाई होगी।



