रांची, 30 सितंबर 2026: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रांची की विशेष PMLA अदालत ने बुधवार को आरोप तय कर दिए। अदालत की इस कार्रवाई के बाद मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। हेमंत सोरेन अदालत की कार्यवाही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।
इस मामले में 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं। हेमंत सोरेन इस केस में उन आरोपियों में अंतिम थे, जिनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया बाकी थी।
आरोप गठन पर रोक की मांग की थी
हेमंत सोरेन की ओर से विशेष PMLA अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया।
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में उनकी ओर से मांग की गई है कि ईडी की जांच से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप गठन की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। इस मामले पर हाई कोर्ट में भी कार्यवाही निर्धारित थी। 29 सितंबर को सुनवाई समयाभाव के कारण टल गई थी और 30 सितंबर को दोपहर 2:15 बजे सुनवाई तय की गई थी।
क्या है बड़गाईं जमीन मामला?
मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों में बदलाव के आरोप सामने आए हैं।
झारखंड हाई कोर्ट के 18 सितंबर 2026 के आदेश में ED की जांच से जुड़े आरोपों और 8.86 एकड़ जमीन के संबंध में अभियोजन पक्ष द्वारा रखे गए तथ्यों का विस्तृत उल्लेख है। हालांकि, ये अभियोजन पक्ष के आरोप और जांच में सामने रखे गए तथ्य हैं; इनका अंतिम न्यायिक निर्धारण ट्रायल में होना है।
ED का आरोप है कि जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और दस्तावेजों में बदलाव के जरिए जमीन को हासिल करने और उसके कब्जे से जुड़े प्रयास किए गए। जांच एजेंसी ने इस मामले में हेमंत सोरेन समेत कई लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
16 आरोपियों पर पहले ही तय हो चुके थे आरोप
इस मामले में विशेष PMLA अदालत पहले ही 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी थी। इनमें तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, बिपिन सिंह, राजकुमार पाहन, अफसर अली और मोहम्मद सद्दाम हुसैन समेत अन्य आरोपी शामिल हैं।
30 सितंबर की कार्रवाई के बाद हेमंत सोरेन के खिलाफ भी आरोप तय होने के साथ इस मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है।
हाई कोर्ट में भी जारी है कानूनी लड़ाई
हेमंत सोरेन ने इससे पहले निचली अदालत में डिस्चार्ज की मांग की थी। झारखंड हाई कोर्ट के 18 सितंबर के आदेश में दर्ज है कि विशेष PMLA अदालत ने 8 जून 2026 को उनकी डिस्चार्ज अर्जी खारिज की थी। इसके बाद हाई कोर्ट में कार्यवाही हुई और आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक की मांग से जुड़ी याचिका भी सामने आई।
अब मामले में निचली अदालत में आरोप तय होने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया ट्रायल के चरण में बढ़ेगी।
महत्वपूर्ण: अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।



