झारखंड में सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद JMM कोटे के दो मंत्री पद खाली हैं। मथुरा महतो, विकास मुंडा और अनंत प्रताप देव के नाम की चर्चा, गिरिडीह सीट को लेकर भी कयास।
Jharkhand Cabinet Expansion: सुदिव्य सोनू के बाद 2 मंत्री पद खाली, मथुरा महतो समेत इन नामों की चर्चा
रांची, 8 सितंबर। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री पदों को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चा तेज हो गई है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) कोटे में अब दो मंत्री पद खाली हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री और जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन इन पदों के लिए किन विधायकों पर भरोसा जताते हैं।
झारखंड मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री समेत कुल 12 मंत्री बनाए जाने का प्रावधान है। मौजूदा महागठबंधन के समीकरण में कांग्रेस के चार और राजद के एक मंत्री हैं, जबकि जेएमएम के हिस्से में सात मंत्री पद हैं। कांग्रेस और राजद का कोटा पूरा माना जा रहा है, जबकि जेएमएम के हिस्से में दो पद खाली हैं।
जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन के बाद अब सुदिव्य सोनू का निधन
हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री रहे जगरनाथ महतो के निधन के बाद रामदास सोरेन को मंत्री बनाया गया था। बाद में रामदास सोरेन का भी निधन हो गया। अब हाल ही में गिरिडीह सदर विधायक और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से जेएमएम के कोटे में दो मंत्री पद खाली हो गए हैं।
इन्हीं रिक्तियों को लेकर पार्टी के भीतर संभावित चेहरों और क्षेत्रीय, जातीय तथा राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है।
मथुरा महतो सबसे मजबूत दावेदारों में
टुंडी विधायक मथुरा महतो का नाम संभावित मंत्रियों की सूची में प्रमुखता से लिया जा रहा है। वह जेएमएम की पुरानी टीम के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं।
मथुरा महतो को पार्टी संगठन और सरकार में काम करने का लंबा अनुभव है। वह दिवंगत शिबू सोरेन के भरोसेमंद नेताओं में भी गिने जाते रहे हैं। 2019 और 2024 में वह हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बन पाए थे।
जातीय समीकरण के लिहाज से भी मथुरा महतो का नाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह ओबीसी समाज से आते हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल में ओबीसी प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए उनके नाम पर विचार की संभावना की चर्चा है।
विकास मुंडा पर भी लग सकता है दांव
तमाड़ विधायक विकास मुंडा भी संभावित दावेदारों में हैं। वह तीन बार के विधायक हैं और एक उपचुनाव समेत लगातार चुनाव जीत चुके हैं।
शांत स्वभाव और युवा चेहरा होने के कारण विकास मुंडा को भी हेमंत सोरेन के संभावित विकल्पों में देखा जा रहा है। वह अनुसूचित जनजाति (ST) समाज से आते हैं।
जेएमएम नेतृत्व यदि आदिवासी प्रतिनिधित्व और युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देता है तो विकास मुंडा के नाम पर भी विचार हो सकता है।
अनंत प्रताप देव भी रेस में
गढ़वा जिले की भवनाथपुर विधानसभा सीट से पहली बार जेएमएम के टिकट पर विधायक बने अनंत प्रताप देव का नाम भी चर्चा में है।
अनंत प्रताप देव इससे पहले कांग्रेस के टिकट पर 2009 में विधायक रह चुके हैं। उन्हें गंभीर और अपेक्षाकृत निर्विवाद छवि वाले नेता के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में जेएमएम नेतृत्व उनके अनुभव को भी मंत्रिमंडल में जगह देने के लिहाज से देख सकता है।
क्या फिर दोहराया जाएगा मधुपुर वाला फॉर्मूला?
मंत्री पदों की चर्चा के बीच 2021 के मधुपुर उपचुनाव का उदाहरण भी दिया जा रहा है।
मधुपुर से तत्कालीन मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने हफीजुल हसन को पहले मंत्री बनाया था। उस समय वह विधायक नहीं थे। बाद में हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की और 2024 के विधानसभा चुनाव में भी अपनी सीट बरकरार रखी।
अब सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह सदर सीट को लेकर भी इसी तरह के राजनीतिक विकल्प की चर्चा शुरू हो गई है।
क्या सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को मिल सकता है मौका?
गिरिडीह सदर सीट के संभावित उत्तराधिकारी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
श्वेता शर्मा की शिक्षा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े पहलुओं के साथ-साथ सुदिव्य सोनू के हेमंत सोरेन के साथ लंबे राजनीतिक संबंधों को भी इस चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, अभी तक जेएमएम की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि गिरिडीह सदर सीट से किसे चुनाव मैदान में उतारा जाएगा या मंत्रिमंडल में खाली पदों के लिए किन नामों पर अंतिम फैसला हुआ है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण पर रहेगी नजर
जेएमएम के सामने दो मंत्री पद भरने के दौरान कई समीकरणों को साधने की चुनौती होगी। इनमें ओबीसी और आदिवासी प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन, संगठन में वरिष्ठता और आगामी राजनीतिक परिस्थितियां अहम हो सकती हैं।
मथुरा महतो, विकास मुंडा और अनंत प्रताप देव जैसे नामों की चर्चा के बीच यह भी देखना होगा कि हेमंत सोरेन अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता देते हैं या नए चेहरों के जरिए मंत्रिमंडल में संतुलन साधते हैं।
फिलहाल अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और जेएमएम नेतृत्व को करना है। इसलिए इन नामों को संभावित दावेदार के तौर पर ही देखा जा रहा है।



