झारखंड में 60 लाख 54 हजार 736 NFSA परिवारों का राशन डेटा ऑनलाइन हो गया है। 2.70 करोड़ लाभुकों की UID सीडिंग और 1.01 करोड़ मोबाइल नंबर लिंक किए गए हैं।
Jharkhand Ration Card Online: 60.54 लाख परिवारों का डेटा ऑनलाइन, 2.70 करोड़ लाभुकों की UID सीडिंग पूरी…
रांची। झारखंड में राशन व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में खाद्य आपूर्ति विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 60 लाख 54 हजार 736 एनएफएसए परिवारों का पूरा डेटा ऑनलाइन कर दिया गया है। इसमें 2 करोड़ 62 लाख 32 हजार 949 सदस्यों की जानकारी शामिल है। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन डेटा से फर्जी राशन कार्ड, डुप्लीकेट नाम और अपात्र लाभुकों की पहचान करने में मदद मिलेगी। साथ ही पात्र परिवारों तक अनाज पहुंचाने की व्यवस्था भी बेहतर होगी।
2.70 करोड़ लाभुकों की UID सीडिंग पूरी
खाद्य आपूर्ति विभाग ने एनएफएसए और ग्रीन कार्ड को मिलाकर कुल 2 करोड़ 70 लाख 60 हजार 80 लाभुकों की UID सीडिंग पूरी कर ली है। यानी लाभुकों की पहचान को आधार से जोड़ा जा चुका है।
UID सीडिंग पूरी होने से राशन वितरण में बायोमेट्रिक सत्यापन की सुविधा मजबूत होगी। इससे सही लाभुक की पहचान कर उसे निर्धारित मात्रा में अनाज देने में मदद मिलेगी। साथ ही फर्जी या डुप्लीकेट लाभुकों की पहचान करना भी आसान हो सकता है।
1.01 करोड़ लाभुकों के मोबाइल नंबर लिंक
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 करोड़ 1 लाख 27 हजार 36 लाभुकों के मोबाइल नंबर भी राशन सिस्टम से जोड़ दिए गए हैं। मोबाइल नंबर लिंक होने के बाद राशन उठाव से संबंधित जानकारी सीधे लाभुकों के मोबाइल पर भेजी जा सकेगी।
लाभुकों को एसएमएस के जरिए यह जानकारी मिल सकती है कि:
- राशन का उठाव कब हुआ।
- डीलर ने कितना अनाज दिया।
- राशन वितरण की प्रक्रिया कब पूरी हुई।
- राशन से संबंधित अन्य जरूरी अपडेट क्या हैं।
इस व्यवस्था से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायतों की संख्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
24,937 डीलरों में से 23,203 ऑनलाइन
झारखंड में कुल 24,937 जन वितरण प्रणाली (PDS) डीलर हैं। इनमें से 23,203 डीलर पूरी तरह ऑनलाइन हो चुके हैं। हालांकि, अभी भी कुछ डीलर डिजिटल सिस्टम से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।
| डीलर की स्थिति | संख्या |
|---|---|
| कुल डीलर | 24,937 |
| ऑनलाइन डीलर | 23,203 |
| ऑफलाइन डीलर | 480 |
| अनमैप्ड डीलर | 1,254 |
आंकड़ों के मुताबिक, 480 डीलर अभी ऑफलाइन हैं, जबकि 1,254 डीलर अनमैप्ड हैं। अनमैप्ड डीलरों का डेटा अभी ऑनलाइन सिस्टम से नहीं जुड़ा है। विभाग का कहना है कि जल्द ही बाकी डीलरों को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
239 डिपो भी ऑनलाइन सिस्टम से जुड़े
राशन वितरण व्यवस्था में अनाज की आपूर्ति करने वाले 239 डिपो भी ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ चुके हैं। इन डिपो के माध्यम से जन वितरण प्रणाली के डीलरों तक अनाज भेजा जाता है।
डिपो, डीलर और लाभुकों के डेटा को ऑनलाइन जोड़ने से राशन की सप्लाई चेन पर निगरानी रखना आसान होगा। इससे अनाज के आवंटन, उठाव और वितरण की जानकारी एक ही सिस्टम में उपलब्ध हो सकेगी।
फर्जी राशन कार्ड पर लगाम लगाने की कोशिश
सरकार राशन व्यवस्था के डिजिटल होने से फर्जी राशन कार्ड, डुप्लीकेट नाम और अपात्र लाभुकों की पहचान में सुधार की उम्मीद कर रही है। आधार सीडिंग, मोबाइल लिंकिंग और ऑनलाइन डीलर सिस्टम के जरिए राशन वितरण की निगरानी मजबूत की जा सकेगी।
हालांकि, जिन लाभुकों का मोबाइल नंबर या आधार लिंकिंग अभी पूरी नहीं हुई है, उन्हें संबंधित डीलर या विभागीय कार्यालय से संपर्क कर अपना डेटा अपडेट कराने की जरूरत पड़ सकती है।



