रामगढ़: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन गुरुवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गईं। उनके पैतृक गांव नेमरा में संथाली परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां को अंतिम विदाई दी।
नेमरा स्थित आवास पर धार्मिक रस्मों के बाद रूपी सोरेन की अंतिम यात्रा निकाली गई। उनका अंतिम संस्कार गांव के ढेकानाला घाट पर किया गया। यह वही स्थान है, जहां दिशोम गुरु शिबू सोरेन का भी अंतिम संस्कार किया गया था।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
रूपी सोरेन के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए झारखंड के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग नेमरा पहुंचे। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने गांव से काफी पहले ही वाहनों को रोकने की व्यवस्था की।
लुकैयाटांड़ और धुमकुड़िया भवन के पास पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। यहां से लोग लगभग सात किलोमीटर पैदल चलकर मुख्यमंत्री के पैतृक आवास और अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचे।
नेमरा में पूरे दिन शोक का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता, समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे।
सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार के दौरान उमड़ी भीड़ को देखते हुए इस बार जिला प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। झारखंड सशस्त्र पुलिस की कई कंपनियों को गांव में तैनात किया गया।
इसके अलावा यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए गोला-मुरी मार्ग पर आवश्यक मरम्मत कार्य कराया गया। रास्ते में बैरिकेडिंग और तोरण द्वार लगाए गए। जगह-जगह रूपी सोरेन की तस्वीरों वाले कटआउट लगाए गए, जिन पर ‘अंतिम जोहार’ और ‘विनम्र श्रद्धांजलि’ जैसे संदेश लिखे थे।
अंतिम विदाई में पहुंचे नेता और सामाजिक हस्तियां
रूपी सोरेन को अंतिम विदाई देने के लिए राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता, विधायक तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग नेमरा पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार, झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर है। संथाली परंपरा के अनुसार दी गई अंतिम विदाई के साथ नेमरा में एक भावुक और गमगीन माहौल देखने को मिला।



