China Evergrande Bankruptcy: 28 लाख करोड़ के कर्ज में डूबी कंपनी, समझें पूरा मामला…
China Evergrande Bankruptcy: कभी दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी रही एवरग्रैंड दिवालिया हो गई। जानिए 28 लाख करोड़ के कर्ज, हुई का यान, थ्री रेड लाइन्स और चीन के रियल एस्टेट संकट की पूरी कहानी…
China Evergrande Bankruptcy: चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रैंड का साम्राज्य आखिरकार कर्ज के बोझ तले ढह गया। 2018 में ब्रांड वैल्यू के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी बनने वाली एवरग्रैंड के खिलाफ कोर्ट ने दिवालिया प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। कंपनी पर करीब 300 अरब डॉलर यानी लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया है। इससे पहले कंपनी के संस्थापक हुई का यान को वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
गरीब परिवार से चीन के सबसे अमीर लोगों में शामिल हुए हुई का यान
एवरग्रैंड के संस्थापक हुई का यान ने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर चीन के सबसे बड़े कारोबारी साम्राज्यों में से एक खड़ा किया। उनकी कंपनी ने चीन के तेजी से बढ़ते शहरीकरण का फायदा उठाते हुए बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू किए।
कंपनी का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से कर्ज लेकर जमीन खरीदने, फ्लैट की एडवांस बुकिंग करने और ग्राहकों से मिले पैसे से नए प्रोजेक्ट शुरू करने पर आधारित था। शुरुआती दौर में इस मॉडल ने कंपनी को तेजी से विस्तार करने में मदद की, लेकिन बढ़ता कर्ज बाद में एवरग्रैंड के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया।
280 शहरों में 1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट
एवरग्रैंड का कारोबार चीन के करीब 280 शहरों तक फैला था। कंपनी के डूबने के समय उसके 1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट अधूरे बताए गए। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ा जिन्होंने घर खरीदने के लिए कंपनी को पैसे दिए थे।
कंपनी पर बढ़ते कर्ज और नकदी संकट के कारण प्रोजेक्ट पूरे करना मुश्किल होता गया। इसके बाद चीन की सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों के अत्यधिक कर्ज को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए।
2018 में बनी थी दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट ब्रांड
एवरग्रैंड के लिए 2018 सबसे शानदार वर्षों में से एक था। ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, उस साल कंपनी की ब्रांड वैल्यू 118 फीसदी बढ़कर 16.2 अरब डॉलर हो गई थी। इसी के साथ एवरग्रैंड ब्रांड वैल्यू के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी बन गई थी।
लेकिन कुछ ही वर्षों बाद कंपनी गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई।
‘थ्री रेड लाइन्स’ ने बढ़ाई मुश्किल
एवरग्रैंड के संकट की बड़ी वजह चीन सरकार की ‘थ्री रेड लाइन्स’ नीति को माना जाता है। 2020 में लागू इस नीति का उद्देश्य रियल एस्टेट कंपनियों को अत्यधिक कर्ज लेने से रोकना था।
इसके तहत कंपनियों के लिए तीन प्रमुख वित्तीय सीमाएं तय की गई थीं—
- Liability Ratio: 70 फीसदी से कम
- Net Debt Ratio: 100 फीसदी से कम
- Cash-to-Short Term Debt: 1 से ज्यादा
इन नियमों के कारण एवरग्रैंड के लिए पहले की तरह आसानी से कर्ज जुटाना मुश्किल हो गया। दूसरी ओर, प्रॉपर्टी की बिक्री और नए प्रोजेक्ट्स से आने वाला कैश फ्लो भी कमजोर पड़ने लगा।
एवरग्रैंड पर कितना कर्ज था?
रिपोर्टों के मुताबिक 2025 में एवरग्रैंड पर 300 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज था। कंपनी की संपत्तियों को बेचकर कर्जदाताओं का पैसा वापस करने की कोशिश की गई, लेकिन कर्ज की तुलना में रिकवरी बेहद कम रही।
लिक्विडेशन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लेनदारों ने कंपनी से अपने पैसे की मांग की। कंपनी के शेयरों को भी लंबे समय तक ट्रेडिंग बंद रहने के बाद हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट कर दिया गया।
हुई का यान को उम्रकैद
एवरग्रैंड के संस्थापक हुई का यान पर वित्तीय धोखाधड़ी और गड़बड़ियों के आरोप लगे। अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। उनकी निजी संपत्ति जब्त करने और राजनीतिक अधिकार खत्म करने की कार्रवाई भी की गई।
कंपनी से जुड़ी अन्य इकाइयों पर भी भारी जुर्माना लगाया गया।
क्या एवरग्रैंड के डूबने से चीन में घर खरीदने वालों पर असर पड़ा?
एवरग्रैंड संकट का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा जिन्होंने कंपनी के प्रोजेक्ट्स में घर बुक किए थे। कई शहरों में प्रोजेक्ट अधूरे रह गए।
चीन सरकार ने घरेलू खरीदारों के हितों को प्राथमिकता देते हुए अधूरे आवासीय प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने पर जोर दिया, ताकि घर खरीदारों का पैसा पूरी तरह न डूबे।
क्या यह चीन का ‘लेहमन मोमेंट’ है?
एवरग्रैंड संकट की तुलना कई बार 2008 के लेहमन ब्रदर्स संकट से की गई। हालांकि दोनों मामलों में बड़ा अंतर है। लेहमन ब्रदर्स के पतन ने वैश्विक बैंकिंग सिस्टम को प्रभावित किया था, जबकि एवरग्रैंड संकट मुख्य रूप से चीन के रियल एस्टेट सेक्टर और घरेलू वित्तीय व्यवस्था से जुड़ा रहा।
इसलिए विशेषज्ञ इसे सीधे तौर पर 2008 जैसे वैश्विक वित्तीय संकट के बराबर नहीं मानते।
चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर
चीन की अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट सेक्टर की बड़ी भूमिका रही है। एवरग्रैंड समेत कई डेवलपर्स के संकट में आने से निर्माण गतिविधियों पर असर पड़ा। इससे स्टील, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री की मांग प्रभावित हुई।
साथ ही, जमीन की बिक्री से होने वाली स्थानीय सरकारों की आय पर भी दबाव बढ़ा और आम लोगों का रियल एस्टेट बाजार पर भरोसा कमजोर हुआ।
भारत के लिए क्या है सबक?
एवरग्रैंड का संकट भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक है। अत्यधिक कर्ज पर निर्भर बिजनेस मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकता।
भारत में RERA, एस्क्रो अकाउंट, प्रोजेक्ट फंड की निगरानी और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने जैसे नियम घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
China Evergrande Crisis: 10 बड़े सवालों में समझें
1. एवरग्रैंड क्यों डूबी?
बढ़ते कर्ज, कमजोर कैश फ्लो और रियल एस्टेट बाजार में गिरावट ने कंपनी को संकट में पहुंचाया।
2. कंपनी पर कितना कर्ज था?
करीब 300 अरब डॉलर से ज्यादा।
3. कंपनी कितने शहरों में फैली थी?
करीब 280 शहरों में।
4. कितने प्रोजेक्ट अधूरे थे?
1,300 से ज्यादा।
5. 2018 में कंपनी क्यों चर्चा में आई?
ब्रांड वैल्यू के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी बनी थी।
6. ‘थ्री रेड लाइन्स’ क्या थीं?
चीन सरकार की वह नीति जिसने रियल एस्टेट कंपनियों के अत्यधिक कर्ज पर नियंत्रण लगाया।
7. संस्थापक हुई का यान के साथ क्या हुआ?
उन्हें वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
8. क्या शेयर बाजार से एवरग्रैंड बाहर हो चुकी है?
हां, लंबे समय तक ट्रेडिंग निलंबित रहने के बाद कंपनी के शेयर हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट कर दिए गए।
9. क्या यह चीन का लेहमन संकट है?
सीधे तौर पर नहीं। इसका असर मुख्य रूप से चीन के रियल एस्टेट और घरेलू वित्तीय क्षेत्र पर रहा।
10. भारत के लिए क्या सबक है?
रियल एस्टेट कंपनियों में कर्ज की सीमा, ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा और प्रोजेक्ट की समय पर डिलीवरी बेहद जरूरी है।



