Jharkhand Naxalism and Organized Crime: नक्सलवाद कमजोर, अब संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क पर पुलिस की नजर

झारखंड में जनवरी से अब तक 113 नक्सली गिरफ्तार, 50 ने आत्मसमर्पण किया और 22 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए। अब पुलिस संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी में है। Jharkhand Naxalism: नक्सलवाद कमजोर, अब संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क पर पुलिस

झारखंड में जनवरी से अब तक 113 नक्सली गिरफ्तार, 50 ने आत्मसमर्पण किया और 22 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए। अब पुलिस संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी में है।

Jharkhand Naxalism: नक्सलवाद कमजोर, अब संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क पर पुलिस की नजर

रांची, 10 सितंबर। झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस मुख्यालय के जनवरी से अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 113 नक्सली गिरफ्तार, 50 ने आत्मसमर्पण किया, जबकि मुठभेड़ों में 22 माओवादी मारे गए। अभियानों के दौरान 111 हथियार और 9,904 कारतूस भी बरामद किए गए।

नक्सली गतिविधियों के कमजोर पड़ने के बाद पुलिस के सामने अब अपराध के बदलते स्वरूप से निपटने की चुनौती है। शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ पुलिस अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके आर्थिक स्रोत, संपत्ति, सहयोगियों और पूरे नेटवर्क पर प्रहार की रणनीति पर काम कर रही है।

नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई में 113 गिरफ्तारियां

झारखंड पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक नक्सल विरोधी अभियानों में कुल 113 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं।

संगठनगिरफ्तार नक्सली
माओवादी49
PLFI30
TSCP23
JJMP10
SJMM1
कुल113

इसी अवधि में 50 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जबकि मुठभेड़ों में 22 माओवादी मारे गए। पुलिस अभियानों में 111 हथियार और 9,904 कारतूस बरामद किए गए।

पुलिस के मुताबिक नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर

आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, झारखंड में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। जहां भी नक्सली गतिविधि या मूवमेंट की सूचना मिलती है, वहां सुरक्षा बलों की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

नक्सल विरोधी अभियान अब केवल जंगलों में मुठभेड़ तक सीमित नहीं है। पुलिस संगठन के कैडर, हथियारों और गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क पर भी लगातार दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

जंगलों से शहरों तक बदला अपराध का स्वरूप

नक्सली गतिविधियों में कमी के बीच पुलिस के सामने संगठित अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। रंगदारी, जमीन पर कब्जे का दबाव, कोयला और बालू कारोबार में वर्चस्व, निर्माण परियोजनाओं और ठेकेदारी में हस्तक्षेप जैसी गतिविधियों में अलग-अलग आपराधिक गिरोहों के नाम सामने आते रहे हैं।

प्रिंस खान, राहुल दुबे, राहुल सिंह, अखिलेश सिंह, अमन साव, सुजीत सिन्हा, डब्लू सिंह और पांडेय गिरोह समेत कई आपराधिक नेटवर्क पुलिस की निगरानी में बताए गए हैं।

पुलिस के लिए चुनौती इसलिए भी जटिल है क्योंकि संगठित अपराध किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। सरगना के जेल में रहने के बावजूद उसके गुर्गे, आर्थिक मददगार और संपर्क तंत्र सक्रिय रह सकते हैं।

संगठित अपराध के खिलाफ 193 गिरफ्तारियां

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, जनवरी से अब तक संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।

इस दौरान:

  • 193 अपराधी गिरफ्तार
  • 63 हथियार बरामद
  • 274 गोलियां बरामद
  • 47 अपराधी जिला बदर
  • 9 आरोपितों के खिलाफ लुकआउट नोटिस

जारी किया गया है।

हालांकि रंगदारी और फायरिंग जैसी घटनाओं से संकेत मिलता है कि संगठित अपराध की चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस अब अपराधियों के आर्थिक और संगठनात्मक आधार को कमजोर करने पर जोर दे रही है।

अब अपराध की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार की तैयारी

पुलिस की रणनीति में अब अपराध से जुड़े आर्थिक नेटवर्क को महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। कुख्यात अपराधियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खाते, आर्थिक लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अपराध से अर्जित धन कहां जाता है, किन कारोबारों में लगाया जाता है और किन लोगों के माध्यम से इसका संचालन होता है।

अपराधी नेटवर्क के लिए आर्थिक संसाधन हथियार खरीदने, गुर्गों को भुगतान करने, ठिकाने उपलब्ध कराने और प्रभाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए आर्थिक स्रोतों पर कार्रवाई को संगठित अपराध के नेटवर्क को कमजोर करने की अहम कड़ी माना जा रहा है।

150 से ज्यादा लोगों की प्रोफाइल तैयार

पुलिस के अनुसार, कुख्यात आपराधिक गिरोहों से जुड़े 150 से अधिक लोगों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है।

इसमें वर्तमान और पूर्व अपराधियों के अलावा उनके संपर्कों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच का दायरा केवल मुख्य आरोपित तक सीमित नहीं है। आर्थिक मददगारों, संरक्षण देने वालों, लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने वालों और अपराधियों को ठिकाना देने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

एटीएस की टीमें वर्तमान और पूर्व अपराधियों के घरों तक पहुंचकर भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं। इससे संपत्ति, रहन-सहन, संपर्क और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल डेटाबेस में दर्ज होगा अपराधियों का नेटवर्क

संगठित अपराध से निपटने के लिए पुलिस ऑनलाइन डिजिटल डेटाबेस तैयार कर रही है। इसमें अपराधियों के आपराधिक रिकॉर्ड के साथ उनके सहयोगियों, संपत्ति, बैंक खातों और नेटवर्क से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी।

आईजी अभियान नरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, पुलिस का लक्ष्य केवल किसी एक अपराधी को गिरफ्तार करना नहीं है। उसके पीछे मौजूद लोगों, आर्थिक मददगारों और हथियार तथा ठिकाने की व्यवस्था करने वालों की भी पहचान की जा रही है।

यानी जांच की दिशा अब अपराधी से नेटवर्क और नेटवर्क से आर्थिक स्रोत तक पहुंचने की है।

पुलिस आधुनिकीकरण पर भी जोर

बदलती अपराध चुनौती से निपटने के लिए पुलिस के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, वर्ष 2025-26 में राज्य के 12 जिलों में ज्वाइंट पुलिस स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं पांच जिलों में सीआई और एसडीपीओ कार्यालय सह आवास का निर्माण जारी है।

वर्ष 2026 में झारखंड पुलिस को:

  • 636 चारपहिया वाहन
  • 849 दोपहिया वाहन

उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त 627 चारपहिया और 848 दोपहिया वाहनों की खरीद के आदेश भी जारी किए गए हैं।

बेहतर वाहन, तकनीकी निगरानी और डिजिटल रिकॉर्ड पुलिस की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके जरिए कार्रवाई को अधिक तेज और लक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है।

अब लड़ाई सिर्फ बंदूक की नहीं, पूरे नेटवर्क की

झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे अभियान के बाद सुरक्षा बलों ने बड़ी बढ़त हासिल की है। गिरफ्तारियों, आत्मसमर्पण, मुठभेड़ों और हथियार बरामदगी के आंकड़े नक्सली संगठनों पर बने दबाव को दर्शाते हैं।

लेकिन अपराध का स्वरूप बदलने के साथ पुलिस के सामने नई चुनौती है। अब मुकाबला सिर्फ जंगल में सक्रिय सशस्त्र दस्तों से नहीं, बल्कि शहरों और कारोबार में फैले आपराधिक नेटवर्क से भी है।

इसलिए संगठित अपराध के खिलाफ अगली रणनीति में सरगना और गुर्गों के साथ-साथ पैसा, संपत्ति, हथियार, सहयोगी, संरक्षण तंत्र और अपराध से जुड़े आर्थिक स्रोत भी निशाने पर हैं।

किसी अपराधी की गिरफ्तारी कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है, लेकिन उसके नेटवर्क को दोबारा खड़ा होने की क्षमता से वंचित करना ही इस लड़ाई की निर्णायक कसौटी होगी।


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