JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के बीच आदिवासी छात्र संघ ने झारखंड सरकार के मंत्रियों से वार्ता की। छात्रों ने न्यायिक जांच, 1932 खतियान आधारित नीति और बैकलॉग भर्ती समेत कई मांगें रखीं।
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: आदिवासी छात्र संघ ने मंत्रियों से की वार्ता, 1932 खतियान समेत कई मांगें
रांची, 08 अगस्त: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच आदिवासी छात्र संघ (ACS) के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ वार्ता की। मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में हुई बैठक में छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था, नियोजन नीति, स्थानीय नीति और जनजातीय-क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े कई मुद्दे सरकार के सामने रखे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. सुशील कुमार मिंज ने किया। बैठक में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय की समिति के सदस्य भी शामिल हुए।
JPSC-JSSC परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
बैठक के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग रखी। साथ ही कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई।
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों के भविष्य पर किसी तरह का असर न पड़े।
1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय और नियोजन नीति की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड की नियोजन नीति और स्थानीय नीति को 1932 के खतियान को आधार बनाकर तैयार करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि राज्य की नौकरियों में स्थानीय युवाओं के हितों की पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए।
इसके अलावा बैकलॉग के रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती शुरू करने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई।
JPSC में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर मांग
छात्रों ने JPSC के पाठ्यक्रम में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अंकों को बढ़ाने और उन्हें अनिवार्य करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई को पूर्व व्यवस्था के अनुसार जारी रखने की भी मांग की।
इसके साथ ही क्लस्टर प्रणाली को तत्काल समाप्त करने का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया।
सरकार ने मांगों पर कार्रवाई का दिया आश्वासन
छात्र प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, राज्य सरकार के मंत्रियों ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और मांगों एवं सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। बैठक में छात्र हित से जुड़े मुद्दों के समाधान और आगे की कार्रवाई को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई।
सरकार की ओर से बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार सोनू और चमरा लिंडा समेत अन्य मंत्री मौजूद रहे।
स्थानीय युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी उठा
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाला राज्य है, लेकिन आदिवासी युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिल पाए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा और बाहरी अभ्यर्थियों को लेकर अपनी चिंताएं मंत्रियों के सामने रखीं।
छात्र संगठनों का कहना है कि JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्थानीय युवाओं के हितों की सुरक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
बैठक में प्रमुख मांगें
- JPSC-JSSC मामलों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच
- दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
- 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय एवं नियोजन नीति
- बैकलॉग पदों पर तत्काल भर्ती
- JPSC में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अंक बढ़ाना
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्य करना
- रांची विश्वविद्यालय में पूर्व व्यवस्था के अनुसार पढ़ाई जारी रखना
- क्लस्टर प्रणाली समाप्त करना
- भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना



