Karwa Chauth Vrat 2026: करवा चौथ का व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही नहीं, बल्कि कुछ परंपराओं में कुंवारी लड़कियां भी अपने होने वाले जीवनसाथी की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं। अगर आपकी शादी तय हो गई है और आप पहली बार यह व्रत रखने जा रही हैं, तो जानें पूजा विधि, सरगी, व्रत खोलने और जरूरी नियमों से जुड़ी खास बातें।
कुंवारी लड़कियां करवा चौथ पर किन देवी-देवताओं की पूजा करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी लड़कियां करवा चौथ के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा कर सकती हैं। माता पार्वती को प्रेम, समर्पण और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के लिए जल से भरा कलश या लोटा रखा जा सकता है। मिट्टी का करवा और सुहाग से जुड़ी सभी सामग्री रखना कुंवारी लड़कियों के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता। शाम को स्वच्छ वस्त्र पहनकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें और करवा चौथ की कथा पढ़ें या सुनें।
कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ व्रत के नियम
1. निर्जला व्रत रखना जरूरी नहीं
कुंवारी लड़कियों के लिए निर्जला व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना जाता। अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फलाहार के साथ व्रत रखा जा सकता है। यदि कमजोरी या कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, तो बिना पानी के उपवास करने से बचें।
2. सरगी का क्या है नियम?
विवाहित महिलाओं को परंपरा के अनुसार सास की ओर से सरगी मिलती है। कुंवारी लड़कियों के लिए सास की सरगी लेना जरूरी नहीं है। वे चाहें तो सूर्योदय से पहले हल्का सात्विक भोजन कर सकती हैं और फिर अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रख सकती हैं।
3. कपड़े और श्रृंगार को लेकर क्या करें?
विवाहित महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करना कुंवारी लड़कियों के लिए जरूरी नहीं है। वे अपनी पसंद के नए या साफ-सुथरे कपड़े पहन सकती हैं और मेहंदी लगा सकती हैं। सिंदूर, मंगलसूत्र और बिछिया जैसी विवाहित महिलाओं से जुड़ी चीजें पहनना आवश्यक नहीं है।
4. थाली घुमाने की रस्म जरूरी है?
करवा चौथ पर थाली घुमाने और आपस में थाली बदलने की रस्म कई परिवारों में प्रचलित है। कुंवारी लड़कियों के लिए इन रस्मों का पालन करना अनिवार्य नहीं माना जाता। पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार की जा सकती है।
5. चांद देखने के बाद कैसे खोलें व्रत?
विवाहित महिलाएं आम तौर पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। कुंवारी लड़कियों के लिए कुछ परंपराओं में तारों, विशेषकर ध्रुव तारे, के दर्शन के बाद या भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके व्रत खोलने की मान्यता है। इसके लिए छलनी से होने वाले पति का चेहरा देखना जरूरी नहीं माना जाता।
हालांकि, व्रत खोलने की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।
पहली बार व्रत रखने वाली लड़कियां इन बातों का रखें ध्यान
- व्रत रखने से पहले अपनी सेहत और शारीरिक क्षमता का ध्यान रखें।
- निर्जला उपवास को अनिवार्य न समझें।
- पूजा के दौरान साफ-सफाई और श्रद्धा का ध्यान रखें।
- पूजा सामग्री और रस्मों को लेकर अनावश्यक दबाव न लें।
- व्रत खोलने की विधि के लिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।
ध्यान दें: करवा चौथ की पूजा और व्रत से जुड़े नियम धार्मिक मान्यताओं तथा स्थानीय परंपराओं पर आधारित हैं। सभी परिवारों में विधि एक जैसी होना जरूरी नहीं है।



