रांची: पवित्र श्रावण मास के अवसर पर साहित्य संगम संस्थान, झारखंड इकाई ने रविवार को अपने विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘सावन की फुहार’ का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का आयोजन भक्ति, संगीत और काव्य के मनमोहक संगम के साथ हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े साहित्यकारों और कलाकारों ने ऑनलाइन सहभागिता की।
मां सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान की सचिव पूनम वर्मा ‘अनूप’ ने मां सरस्वती की वंदना एवं स्वागत उद्बोधन के साथ की। इसके बाद सावन और भगवान शिव पर आधारित भजनों तथा काव्य प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ।
देशभर के साहित्यकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में झारखंड, राजस्थान और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं और भजनों से शिवमय वातावरण बनाया।
मुख्य प्रस्तुतियों में शामिल रहे—
- करुणा सिंह ‘कल्पना’ – “मुझको जिसने भी पूजा है, उसका जीवन धन्य हुआ”
- अर्पणा सिंह ‘अर्पी’ – “शिव शंभू चले कैलाश, बूंदें पड़ने लगी”
- सुजाता प्रिय समृद्धि – “भोला के चरणों में ध्यान लगाओ”
- कल्याणी झा ‘कनक’ – “रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे…”
- खुशबू बरनवाल – “शिव जी आए घर-घर मंदिर…”
- मधुमिता साहा और लक्ष्मी कुमारी ने भी अपनी रचनाओं से सभी का मन मोह लिया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिया प्रेरक संदेश
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह ‘मंत्र’ ने अपने उद्बोधन में जीवन में सच्चे आनंद और सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। उनके विचारों ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों को प्रेरित किया।
हर रविवार होगा ‘सावन की फुहार’ कार्यक्रम
संस्थान के मार्गदर्शक डॉ. प्रशांत करण, निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’, संयोजिका पूनम वर्मा ‘अनूप’ तथा डॉ. नवीन कुमार भट्ट ‘नीर’ ने बताया कि श्रावण मास के प्रत्येक रविवार को ‘सावन की फुहार’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इसके साथ ही पूरे श्रावण मास में प्रतिदिन ‘शिवार्चन संध्या’ के तहत एकल काव्य पाठ का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसका संयोजन सरोज शुक्ला श्री कर रहे हैं।
23 अगस्त को होगा भव्य समापन
कार्यक्रम का समापन 23 अगस्त 2026 को संस्थान के संरक्षक डॉ. प्रशांत करण के समापन संबोधन के साथ होगा। इस अवसर पर देशभर के साहित्यकार, विद्वान और साहित्य प्रेमी ऑनलाइन जुड़ेंगे।



