शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर को घटस्थापना, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

रांची: शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का संकल्प लिया जाता है और विधि-विधान से घटस्थापना की जाती है। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि पर चित्रा नक्षत्र और वैधृति

रांची: शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का संकल्प लिया जाता है और विधि-विधान से घटस्थापना की जाती है। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि पर चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के संयोग को लेकर घटस्थापना के शुभ समय पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इस बार सुबह के समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का पूर्वार्द्ध रहने के कारण घटस्थापना के समय का चयन महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर नवरात्रि की पूजा आरंभ करना मंगलकारी माना जाता है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त कब है?

11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए प्रकाशित समय इस प्रकार हैं:

  • सुबह 10:08 बजे के बाद: घर में घटस्थापना के लिए सुझाया गया समय।
  • सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक: अभिजीत मुहूर्त।
  • सुबह 9:25 बजे के बाद: विशेष परिस्थितियों में बताया गया एक अन्य विकल्प।

ध्यान रखें कि ये समय संबंधित ज्योतिषीय रिपोर्ट में दिए गए हैं। पूजा का मुहूर्त स्थान के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को लेकर क्या है मान्यता?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, घटस्थापना के लिए प्रतिपदा की शुरुआती घड़ियों और चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग के कुछ हिस्सों को वर्जित माना गया है। इस वर्ष इन योगों के कारण सुबह के समय को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, चित्रा नक्षत्र का पूर्वार्द्ध सुबह 10:08 बजे तक और वैधृति योग का पूर्वार्द्ध सुबह 9:25 बजे तक बताया गया है। इसी आधार पर सुबह 10:08 बजे के बाद घटस्थापना का समय सुझाया गया है।

घटस्थापना का धार्मिक महत्व

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ पूजा और अनुष्ठान की शुरुआत होती है। धार्मिक परंपरा में कलश को शुभता, समृद्धि और देवी-देवताओं के आह्वान का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि विधिपूर्वक घटस्थापना करने से नवरात्रि के अनुष्ठान का शुभारंभ होता है।

इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। कई घरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाई जाती है और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

घटस्थापना से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  1. पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
  2. पूजा सामग्री और कलश स्थापना के लिए आवश्यक वस्तुएं पहले से तैयार रखें।
  3. परंपरा के अनुसार पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें।
  4. भगवान गणेश का स्मरण कर पूजा का संकल्प लें।
  5. स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करें।
  6. इसके बाद मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ नवरात्रि के अनुष्ठान आरंभ करें।

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष तैयारियां की जाती हैं। श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास, पूजा-पाठ और भक्ति के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं।

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