US Tariff on India: सीनेट ने 100% टैरिफ बिल पास किया, भारत पर क्या होगा असर?
US Senate ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल 86-11 से पास किया। भारत पर संभावित असर, रूसी तेल आयात और आगे की प्रक्रिया जानें…
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर कड़ा दबाव बनाने वाले एक अहम बिल को 86-11 वोटों से पास कर दिया है। इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों के उत्पादों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत और चीन समेत पांच देश इसके संभावित दायरे में हैं।
हालांकि, अभी भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। सीनेट से पारित बिल को अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी House of Representatives में जाना है। वहां मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही यह कानून बन सकेगा।
कौन-कौन से देश निशाने पर?
बिल में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। मौजूदा रिपोर्टों के मुताबिक संभावित रूप से प्रभावित पांच देशों में:
- भारत
- चीन
- स्लोवाकिया
- हंगरी
- अजरबैजान
शामिल हैं।
इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई पर दबाव डालना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी वित्तीय क्षमता को कमजोर करना है।
500% टैरिफ से 100% तक कैसे पहुंचा मामला?
रूस के खिलाफ प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों के शुरुआती संस्करण में दूसरे देशों के सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान चर्चा में था। बाद के संशोधित प्रस्ताव में प्रमुख रूसी ऊर्जा खरीदारों पर टैरिफ की अधिकतम दर 100% तक रखने का प्रावधान सामने आया। वहीं बिल में रूस से आने वाले कुछ सामान पर अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिक ऊंचे टैरिफ लगाने की शक्तियां भी प्रस्तावित हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। जून 2026 में Kpler के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने रूस से करीब 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग 52.4% था। मई की तुलना में रूसी तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी हुई।
यही वजह है कि अमेरिकी सीनेट के इस बिल का भारत पर संभावित असर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगर बिल कानून बनता है तो भारत पर क्या असर हो सकता है?
1. अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात महंगा हो सकता है
अगर भारत पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों की कीमत काफी बढ़ सकती है। इसका असर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, लेदर, केमिकल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका है।
भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कीमतों और सप्लाई चेन की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
2. रूस से तेल खरीदने की रणनीति पर दबाव
दूसरी तरफ भारत को रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने और अमेरिकी व्यापारिक हितों के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।
अगर रूसी तेल की खरीद में बड़ी कमी आती है और भारत को दूसरे स्रोतों से ज्यादा तेल खरीदना पड़ता है, तो आयात लागत बढ़ने का जोखिम रहेगा। इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और घरेलू ईंधन कीमतों पर परिस्थितियों के अनुसार पड़ सकता है।
3. भारतीय कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ेगी
बिल के कानून बनने और उसके बाद वास्तविक टैरिफ लागू होने की स्थिति में अमेरिकी बाजार पर निर्भर भारतीय कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कानून का अंतिम स्वरूप क्या रहता है और अमेरिकी प्रशासन इसका इस्तेमाल किस तरह करता है।
अमेरिका का मकसद क्या है?
अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली कमाई उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक समर्थन देती है। इसलिए रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर आर्थिक दबाव डालकर उसकी आय कम करने की कोशिश की जा रही है।
यह बिल रूस के अलावा ईरान से संबंधित प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने और रूसी ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों तथा अन्य संबंधित लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों को मजबूत करने के प्रावधान भी रखता है।
अभी भारत पर 100% टैरिफ लगा है या नहीं?
नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।
अमेरिकी सीनेट ने बिल को मंजूरी दी है, लेकिन यह अभी कानून नहीं बना है। आगे इसे प्रतिनिधि सभा से पारित होना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही यह कानून बन सकता है। इसके अलावा, बिल राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देता है—इसका मतलब यह नहीं कि 100% टैरिफ तुरंत और अनिवार्य रूप से लागू हो गया है।
भारत-रूस तेल कारोबार पर नजर
भारत के लिए रूस लंबे समय से महत्वपूर्ण कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। जून में रूसी क्रूड की हिस्सेदारी पहली बार भारत के कुल तेल आयात में आधे से अधिक पहुंची। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ संबंधी प्रस्ताव का आगे का घटनाक्रम भारत की ऊर्जा खरीद रणनीति और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।



