CMPFO के 727.67 करोड़ रुपये डूबने के मामले में CBI जांच का आदेश, DHFL निवेश पर हाईकोर्ट सख्त

रांची, 8 अक्टूबर: झारखंड हाईकोर्ट ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (CMPFO) के 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़े मामले में CBI जांच का आदेश दिया है। मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में CMPFO की ओर से किए गए करीब 1300 करोड़

रांची, 8 अक्टूबर: झारखंड हाईकोर्ट ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (CMPFO) के 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़े मामले में CBI जांच का आदेश दिया है। मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में CMPFO की ओर से किए गए करीब 1300 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है।

चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल एम्पलाई वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह ने अदालत में पक्ष रखा।

DHFL में किया गया था 1300 करोड़ का निवेश

मामले के अनुसार CMPFO की ओर से DHFL में करीब 1300 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। जून 2019 में फंड मैनेजर SBI और UTI की ओर से DHFL की वित्तीय स्थिति को लेकर रेड अलर्ट जारी करते हुए निवेश की रकम निकालने की सलाह दी गई थी।

आरोप है कि इसके बावजूद तत्कालीन बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया। बाद में DHFL के दिवालिया होने के कारण निवेश की बड़ी राशि फंस गई और 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

छह महीने बाद पैसा निकालने का प्रस्ताव

बताया गया कि DHFL से निवेश की रकम निकालने का प्रस्ताव करीब छह महीने बाद दिसंबर 2019 में पारित किया गया। इसके बाद नवंबर 2021 में इन्वेस्टमेंट सब-कमेटी की ओर से हुए नुकसान को राइट ऑफ करने का प्रस्ताव रखा गया।

इस प्रस्ताव का कर्मचारियों ने विरोध किया। नुकसान की भरपाई के लिए कोयला उत्पादन पर 10 रुपये प्रति टन सेस लगाने की योजना भी सामने आई थी।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

मामले में विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहे तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। सुनवाई के दौरान CMPFO की ओर से संबंधित अधिकारियों को क्लीन चिट दिए जाने से हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई।

अब हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश के बाद निवेश प्रक्रिया, फैसलों में शामिल अधिकारियों की भूमिका और नुकसान से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच केंद्रीय एजेंसी द्वारा किए जाने का रास्ता साफ हुआ है।

कोर्ट के इस आदेश से CMPFO के कर्मचारियों के भविष्य निधि से जुड़े इस बड़े वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।

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